भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण से अंजान है अधिकतर ग्रामीण जनता

सरकार ने 2047 तक बीमा क्षेत्र की पहुँच शत प्रतिशत जनता तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा है लेकिन अभी शहरी के साथ साथ अधिकतर ग्रामीण जनता आई आर डी ए आई अर्थात भारतीय बीमा विनियामक विकास प्राधिकरण से अनभिज्ञ है। ऐसे में यह लक्ष्य कितने प्रतिशत तक हासिल हो जाएगा,कुछ कहना मुश्किल है। सरकार को ऐसा कोई माध्यम अपनाना चाहिए जिसके द्वारा इस प्राधिकरण और उसके कार्य की जानकारी अधिक से अधिक जनता तक मिल सके। सोशल मीडिया भी इसके लिए भी एक बड़े माध्यम के रूप में प्रयोग किया जा सकता है। अधिकतर ग्रामीण जनता ने सहारा, पी ए सी एल, अलकेमिस्ट, और रोज वैली जैसी कंपनियों को प्राइवेट बीमा समझकर अपना धन निवेश कर दिया जो आज तक उनको वापस प्राप्त नहीं होने के कारण वो प्राइवेट बीमा कंपनियों के प्रति एक गलतफहमी अपने दिमाग में पाल चुके हैं। ऐसी स्थिति में अकेले भारतीय जीवन बीमा निगम क्या इस लक्ष्य को हासिल कर सकेगी यह एक यक्ष प्रश्न है जबकि लोगों का एक बड़ा हिस्सा अभी भी निगम के पास लावारिस पड़ा हुआ है जिससे निगम के छबि की भी भारतीय समाज में किरकिरी हो गई है।

ऐसी स्थिति में यदि सरकार अपने लक्ष्य को प्राप्त करना चाहती है तो उसे सबसे पहले बीमा में काम कर रही सभी कंपनियों में होने वाले निवेश की जिम्मेदारी प्राधिकरण के माध्यम से स्वयं लेने  की बात को जन जन तक पहुँचाने का काम त्वरित गति से करना होगा। जिससे बीमा को एक सुरक्षित निवेश मानने की स्वाभाविक प्रवृत्ति जन सामान्य में स्वयं बनने लगेगी। 

यद्यपि आई आर डी ए आई ने बहुत से सुधार किये हैं तथा बीमा को एक गति प्रदान किया है लेकिन यह सब जानकारी समाज में कुछ प्रतिशत लोगों तक ही है। ऐसे में प्राधिकरण का व्यापक प्रचार प्रसार होना ही लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये एक उपयोगी कदम होगा।। 

रिपोर्टर

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