250 वर्ष पुरानी दुर्लभ पांडुलिपि प्रशासन को सौंपी पुरातन धरोहर संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
- राजेंद्र यादव, ब्यूरो चीफ, मध्यप्रदेश
- Jun 02, 2026
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राजगढ़ । जिले के एक प्राचीन केवलय योग आश्रम में आयुर्वेदिक औषधि के कार्य करने वाले श्री गोकुल प्रसाद दांगी ने लगभग 250 वर्ष पुरानी दुर्लभ पांडुलिपि को संरक्षित रखा एवं शोध के उद्देश्य से जिला प्रशासन को उपलब्ध कराया गया है। यह पांडुलिपि ब्रजभाषा में तथा देवनागरी लिपि में लिखी गई है, जिसमें औषधि निर्माण एवं उपचार संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी संकलित है। प्राप्त जानकारी के अनुसार इस अमूल्य धरोहर का संरक्षण वर्षों से आश्रम से जुड़े श्री दांगी द्वारा किया जाता रहा है। वर्तमान में आश्रम के संरक्षक गुरुजी के मार्गदर्शन में पांडुलिपि में वर्णित ज्ञान का उपयोग जनकल्याण एवं आम लोगों की सेवा के लिए किया जा रहा है।
पांडुलिपि को कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा को सौंपा गया, जिससे इसके ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक महत्व का परीक्षण कराया जा सके तथा इसे भारत सरकार की प्राचीन विरासत संरक्षण योजनाओं से जोड़ा जा सके। विशेषज्ञों द्वारा इसके अध्ययन एवं संरक्षण से क्षेत्र के इतिहास तथा पारंपरिक भारतीय चिकित्सा ज्ञान के नए आयाम सामने आने की संभावना है। इस अवसर पर कलेक्टर डॉ. मिश्रा ने जिले के नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि यदि किसी व्यक्ति, परिवार, मंदिर, आश्रम अथवा संस्था के पास ऐसी कोई प्राचीन पांडुलिपि, दस्तावेज, अभिलेख या ऐतिहासिक रिकॉर्ड सुरक्षित हो, तो वे अपने संबंधित क्षेत्र के एसडीएम कार्यालय अथवा जिला प्रशासन की टीम को इसकी जानकारी अवश्य दें। ऐसे दुर्लभ दस्तावेज हमारी सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जिनका संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए आवश्यक है। जिला प्रशासन द्वारा नागरिकों से इस अभियान में सक्रिय सहयोग की अपेक्षा की गई है, ताकि क्षेत्र की ऐतिहासिक धरोहरों को पहचानकर उनका वैज्ञानिक संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।


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