डाक बंगले में गंदगी और कूड़े का अंबार, सड़े आलू,फल और सब्जी की दुर्गंध से उठ रहे बदबू कई रोगों को दे रहे आमंत्रण
- कुमार चन्द्र भुषण तिवारी, उप संपादक बिहार
- Nov 21, 2025
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संवाददाता श्याम सुंदर पाण्डेय की रिपोर्ट
दुर्गावती(कैमूर)-- प्रखंड अंतर्गत दुर्गावती नदी के तट पर स्थित अंग्रेजों के काल का बना डाक बंगला दुर्गावती की शोभा ही नहीं बढ़ा रहा था बल्कि आने जाने वाले राजनेता पदाधिकारी और सैलानियों के लिए ठहरने का एक उत्तम स्थान था। रंग बिरंग के फूलों से और अशोक पेड़ के वृक्षों से सुसज्जित यह डाक बंगला दुर्गावती बाजार से गुजरने वाली राष्ट्रीय राजमार्ग पर आने जाने वालों को बरबस अपनी ओर आकर्षित कर लेता था। बंगले के अंदर दो मंजिला भवन बंगले में रखे सोफे और झारखंडी कुर्सियां टेबल पर रखे अखबार की प्रतियां नदी की तरफ भवन के खुली खिड़कियां डाक बंगले में चार-चार चांद लगा हुई थी। रात्रि में रुकने के लिए मच्छरदानी शीशम की निर्मित पलंग से यात्री और पदाधिकारीयों को काफी सुकून मिलता था।लेकिन राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण के समय कुछ हिस्से बाउंड्री में चले जाने के कारण आज भी वह अपनी पहचान को खोते जारहा है। दुर्गावती बाजार में आने जाने वाले राहगीर भी अपनी थकान दूर करने के लिए डाक बंगला परिसर में जाकर वृक्षों की छाया में आराम करते थे लेकिन आज शेष बचे हुए ग्राउंड में दुर्गावती बाजार के सब्जी विक्रेता हो चाहे फल विक्रेता हो या बाजार वासी हो सभी लोग अपना अपना कूड़ा परिसर में फेंकते हैं जिससे परिसर में काफी बदबू उठ रही है। वैसे तो दुर्गावती बाजार में दुर्गा मंदिर के परिसर का बगल का हिस्सा हो या दुर्गावती नदी तट का पश्चिमी किनारा पूर्वी किनारा तथा बाजार का अन्य हिस्सा जहां तहां बिखरे पड़े कूड़े के कारण दुर्गंध मय बना हुआ है। प्रधानमंत्री द्वारा चलाए गए स्वच्छता अभियान के तहत एक आस जगी थी लेकिन वह समाप्त हो गई अब देखना यह है कि बिहार में बनी नई सरकार स्वच्छता अभियान को फिर से चलाएगी या गांव से लेकर शहर के चौक चौराहे गलियों को कूड़े के अंबर से पटा हुआ छोड़ देगी जो कई असाध्य रोगो को जन्म देगा।


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