राधा कृष्ण उच्च विद्यालय में दौड़ प्रतियोगिता देखने आए एक 10 वर्षीय बालक का भीड़ में दब जाने से पैर हुआ फैक्चर
- कुमार चन्द्र भुषण तिवारी, उप संपादक बिहार
- Dec 30, 2025
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अनुमंडल संवाददाता सिंगासन सिंह यादव की रिपोर्ट
भभुआं (कैमूर)-- भभुआं अनुमंडल क्षेत्र राधाकृष्ण उच्च विद्यालय, चीताढ़ी के खेल मैदान से एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जिसने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है। दौड़ प्रतियोगिता देखने आए एक 10 वर्षीय मासूम बालक के साथ ऐसा हादसा हुआ, जिसकी कल्पना भी किसी ने नहीं की थी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, चैनपुर प्रखंड अंतर्गत राधाकृष्ण उच्च विद्यालय, चीताढ़ी में खेल प्रतियोगिता आयोजित थी। इसी दौरान दौड़ प्रतियोगिता देखने के लिए सैकड़ों बच्चे मैदान में मौजूद थे। भीड़ अधिक होने के कारण बच्चे इधर-उधर भाग रहे थे। इसी अफरा-तफरी में चैनपुर प्रखंड निवासी राधेश्याम शाह के 10 वर्षीय पुत्र आदित्य जयसवाल भी भीड़ में दब गया। गिरने के बाद कई बच्चों के पैरों तले कुचले जाने से उसका दाहिना जांघ बुरी तरह फैक्चर हो गया।
घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची उसकी दादी अपने पोते की हालत देखकर बिलख पड़ी। स्थानीय लोगों की मदद से डायल 112 पर कॉल कर चैनपुर थाना को सूचना दी गई। पुलिस की सहायता से घायल बालक को तत्काल चैनपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए भभुआ सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया।
लेकिन सवाल तब खड़ा हुआ जब भभुआ जैसे जिला मुख्यालय के सरकारी अस्पताल में भी एक फैक्चर पीड़ित बच्चे का समुचित इलाज नहीं हो सका। डॉक्टरों ने इलाज करने के बजाय उसे वाराणसी, उत्तर प्रदेश रेफर कर दिया। अब सोचने वाली बात यह है कि एक गरीब परिवार के बच्चे को इलाज के लिए दूसरे राज्य भेजना कहां तक उचित है?
स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है। जनता का कहना है कि भभुआ सदर अस्पताल में सरकारी डॉक्टर मौजूद रहते हुए भी गंभीर मरीजों को रेफर कर दिया जाता है, जबकि कई डॉक्टर निजी अस्पताल धड़ल्ले से चला रहे हैं। अस्पताल परिसर में दिनभर दलाल घूमते रहते हैं, जो गरीब मरीजों को बहला-फुसलाकर महंगे निजी इलाज की ओर धकेल देते हैं, लेकिन प्रशासन इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं करता।
अब जिले की जनता माननीय मंत्री, सांसद और विधायक से सवाल पूछ रही है कि जब सरकारी अस्पताल में एक बच्चे के टूटे पैर का इलाज संभव नहीं है, तो आम गरीब जनता किस पर भरोसा करे? क्या गरीबों का इलाज केवल रेफर और दलाली के भरोसे छोड़ दिया गया है? यह घटना सिर्फ एक बच्चे की नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की विफलता को दर्शाती है।


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