भिवंडी महापौर चुनाव में ‘खेला’, भाजपा में बगावत- कांग्रेस की रणनीति सफल
- महेंद्र कुमार (गुडडू), ब्यूरो चीफ भिवंडी
- Feb 20, 2026
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भाजपा के बागी नारायण चौधरी बने महापौर
कांग्रेस के समर्थन से तारिक मोमिन उपमहापौर
महायुति की फूट से बदले समीकरण
भिवंडी। भिवंडी-निजामपुर महानगरपालिका के हाई-वोल्टेज महापौर चुनाव में बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला। चुनाव में भाजपा के भीतर बगावत और क्रॉस वोटिंग के चलते सत्ता समीकरण पूरी तरह बदल गए। भाजपा के बागी नगरसेवक नारायण चौधरी कांग्रेस और राकांपा (शरद) के समर्थन से महापौर चुने गए, जबकि कांग्रेस के तारिक मोमिन उपमहापौर निर्वाचित हुए। इस चुनाव को राजनीतिक गलियारों में “चंद्रपुर पैटर्न” जैसा उलटफेर माना जा रहा है, जिसमें विरोधी दल के बागियों के सहारे सत्ता हासिल की गई। चुनाव परिणामों ने भाजपा और महायुति की रणनीति को बड़ा झटका दिया, जबकि कांग्रेस खेमे में उत्साह का माहौल रहा।
भाजपा के साथ हुआ ‘खेला’......
महापौर पद के चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा के बागी नगरसेवकों को साथ लेकर बाजी पलट दी। भाजपा के बागी नारायण चौधरी को कांग्रेस की ओर से उम्मीदवार बनाया गया और उन्हें 48 मत प्राप्त हुए। इसमें कांग्रेस के 30, राकांपा (शरद) के 12 तथा भाजपा के 6 बागी नगरसेवकों का समर्थन शामिल था। इस तरह भाजपा का नगरसेवक ही कांग्रेस के समर्थन से महापौर चुना गया। वहीं कांग्रेस के तारिक मोमिन 43 मतों के साथ उपमहापौर निर्वाचित हुए। सूत्रों के अनुसार भाजपा द्वारा अंतिम समय में महापौर उम्मीदवार बदलने का फैसला पार्टी पर भारी पड़ गया। इससे पार्टी दो गुटों में बंट गई और असंतुष्ट नगरसेवकों ने खुलकर बगावत कर दी।
त्रिकोणीय मुकाबले में भाजपा तीसरे स्थान पर.....
महापौर चुनाव की प्रक्रिया पीठासीन अधिकारी एवं ठाणे जिलाधिकारी डॉ. श्रीकृष्णनाथ पांचाल की अध्यक्षता में दोपहर 12 बजे शुरू हुई। आयुक्त अनमोल सागर और नगर सचिव अजय पाटील की उपस्थिति में मतदान कराया गया। महापौर पद के लिए 10 नामांकन दाखिल हुए थे, जिनमें से सात उम्मीदवारों ने नाम वापस ले लिया। अंतिम मुकाबला नारायण चौधरी, कोणार्क विकास आघाड़ी के विलास पाटील और भाजपा उम्मीदवार स्नेहा मेहुल पाटिल के बीच हुआ।
नारायण चौधरी को 48 मत मिले, जिसमें कांग्रेस के 30, शरद पवार की एनसीपी के 12 और भाजपा के 6 वोट मिले। जबकि विलास पाटील को 26 मत प्राप्त हुए। उन्हें शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के 12, समाजवादी पार्टी के 6, कोणार्क विकास आघाड़ी के 4 तथा भिवंडी विकास आघाड़ी के 3 नगरसेवकों का समर्थन मिला। भाजपा उम्मीदवार स्नेहा पाटिल को मात्र 16 मत मिले और पार्टी तीसरे स्थान पर रही। एक निर्दलीय नगरसेवक मतदान से अनुपस्थित रहा। धोखाधड़ी मामले में जेल में बंद कोणार्क विकास आघाड़ी के उम्मीदवार विलास पाटील मतदान के लिए पुलिस बंदोबस्त में मनपा मुख्यालय पहुंचे थे।
उपमहापौर पद पर भी कांग्रेस की जीत.....
उपमहापौर पद के लिए सात नामांकन दाखिल किए गए थे, जिनमें से चार उम्मीदवारों ने नाम वापस ले लिया। त्रिकोणीय मुकाबले में कांग्रेस उम्मीदवार तारिक मोमिन को 43 मत मिले। उन्हें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 30, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के 12 तथा भाजपा के एक नगरसेवक का समर्थन मिला।
भिवंडी विकास आघाड़ी के जावेद दलवी को 25 मत मिले, जबकि भाजपा उम्मीदवार सुहास नकाते को 21 मत प्राप्त हुए।
महायुति की फूट से बदले समीकरण.....
महापौर और उपमहापौर चुनाव में महायुति पूरी तरह बिखरी नजर आई। भारतीय जनता पार्टी और सहयोगी दलों के बीच मतभेद खुलकर सामने आए। सूत्रों के अनुसार शिवसेना (शिंदे) ने भाजपा का साथ देने के बजाय महापौर चुनाव में कोणार्क विकास आघाड़ी और उपमहापौर चुनाव में भिवंडी विकास आघाड़ी का समर्थन किया.महायुति के पास लगभग 42 सीटें होने के बावजूद आपसी मतभेदों के कारण भाजपा और उसके सहयोगी सत्ता से दूर रह गए। भाजपा का महापौर बनाने का दावा पूरी तरह ध्वस्त हो गया।
उम्मीदवार बदलना पड़ा भारी....
भाजपा ने पहले नारायण चौधरी को महापौर उम्मीदवार घोषित किया था, लेकिन चुनाव से दो दिन पहले उनका नाम वापस लेकर हाल ही में पार्टी में शामिल हुई स्नेहा मेहुल पाटिल को उम्मीदवार बना दिया गया। इस फैसले से पार्टी में नाराजगी फैल गई और भाजपा दो गुटों में बंट गई। कांग्रेस ने मौके का फायदा उठाते हुए नारायण चौधरी को समर्थन देकर चुनाव मैदान में उतार दिया। भाजपा के छह नगरसेवकों की क्रॉस वोटिंग से चौधरी महापौर निर्वाचित हो गए।
भाजपा के बागी नगरसेवक.....
भाजपा से बगावत कर कांग्रेस के पक्ष में मतदान करने वाले नगरसेवकों में सुहास नकाते (प्रभाग 18-डी), नंदिनी महेंद्र गायकवाड़ (17-ए), दीपा माढवी (18-बी), साबुसाद अशफाक शेख (18-सी), अश्वनी फूटाणकर (18-ए) और नारायण चौधरी (23-सी) शामिल बताए जा रहे हैं।
बताया जाता है कि इनमें से अधिकांश नगरसेवक स्थानीय भाजपा नेतृत्व के करीबी माने जाते हैं और तीन नगरसेवक निर्विरोध चुने गए थे।
महापौर और उपमहापौर चुनाव के दौरान महानगरपालिका मुख्यालय पर कड़ा पुलिस बंदोबस्त तैनात किया गया था। चुनाव परिणामों के बाद विजयी महापौर और उपमहापौर का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया गया। इस चुनाव परिणाम को भिवंडी की राजनीति में बड़ा मोड़ माना जा रहा है, जहां जोड़तोड़ की राजनीति में पहली बार कांग्रेस ने भाजपा को उसी की शैली में मात देकर मनपा की सत्ता पर कब्जा जमा लिया।


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