जन जन की हैं इष्ट भवानी, बता रहे हैं गुरुवर ज्ञानी - सीमा योगभारती


अनिल कुमार सिंह 

 

ब्यूरो चीफ भोजपुर ।चैत्र नवरात्रि प्रारंभ हो गई। सभी लोग मां की आराधना करेंगे,नव दिनों तक हम मां की भक्ति करते है उपासना करते हैं। लेकिन क्या ये हम विचार करते है कि मां के ये पावन दिन हमें क्या सिखाने आते है, ये सौभाग्य हमें क्यों प्राप्त होता है? मां के ये पर्व हमें अपने आप का शोधन करने अपने शरीर के त्रिगुणात्मक गुणों सत्व, रजस, तमस को संतुलित करने के लिए प्राप्त होते ताकि हम अपनी आत्मा की नजदीकता को प्राप्त कर सके। हम उपवास करते हैं जिससे हमारा तन और मन संतुलित रहे और हम मां की भक्ति निर्विघ्न रूप से कर सके ताकि हमें मां की नजदीकता प्राप्त हो। चैत्र नवरात्रि हो या शारदीय नवरात्रि हो दोनों समय प्रकृति भी संतुलित होती है यह वह समय होता है जब दिन रात बराबर हो रहे होते हैं, मौसम भी संतुलन में होता है। हमें भी अपने शरीर और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित कर माँ की भक्ति करना चाहिए उनकी आराधना करनी चाहिए। 


परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज कहते है कि आपकी आत्मा की जननी माता आदि शक्ति जगत जननी जगदम्बा है। हर जन जन की मूल जननी माता आदि शक्ति जगतजननी जगदम्बा है। वह प्रकृति सत्ता जो अजन्मा हैं, अविनाशी हैं, ब्रह्म विष्णु महेश को भी जो जन्म देने वाली हैं, जो सभी देवताओं की जननी हैं, जो कई लोको की जननी हैं और उस मां की ये कृपा है उनकी महानता है कि उन्होंने पूरे ब्रह्मांड को हम सब की आत्मा में समाहित कर रखा है। और जब हम पूर्णता की ओर बढ़ना चाहते है तो उस पूर्णत्व की इष्ट की की ओर बढ़ेंगे तभी हमें पूर्णत्व की प्राप्ति होगी।



जब समाज मां की भक्ति करता है तो अनेकों कामनाएं मां के चरणों में रख देता है लेकिन हमें मां से क्या मांगना जो जन जन की जननी है। क्या वो इतना भी नहीं जानती कि हमें क्या चाहिए क्या नहीं चाहिए? हमें तो मां से सिर्फ मां से भक्ति, ज्ञान और आत्मशक्ति की कामना करनी चाहिए। इसी से हमारी आत्मा का विकास होगा और हमारा उत्थान होगा। 


 वह ममता की वो सागर है जिसका पार नहीं पाया जा सकता। हम मां से प्रेम करना तो सीखे। उन्हें अपना मान कर उनकी पूजा करें उनकी स्तुति करे। मां की आराधना में हुई बड़ी से बड़ी गलतियों को वो क्षमा कर देती है और माँ क्षमा नहीं करेंगी तो कौन करेगा। इसलिए हमें नित्य ब्रह्मुहुर्त में उठ कर आदिशक्ति की पूजा करना चाहिए। और यह सत्य स्वीकार लेना चाहिए कि वही एक इष्ट हैं इस पूरी मानवता की।


पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम धाम मध्यप्रदेश में मां जगजननी की पिछले 30 वर्षों से अखंड श्री दुर्गा चालीसा पाठ विश्वशांति हेतु अनंत काल के लिए अनवरत जारी है। समाज को चाहिए कि एक बार मां की कृपा का एहसास वहां जाकर भी करे। 


मां की कृपा प्राप्त करने के लिए हमें खुद को मां के अनुसार ढालना होगा। मां हमसे जो चाहती है वो करना हम शुरू कर दे फिर न मां हमसे दूर हैं और न हम मां से दूर हैं। मां तो हम से बस चाहती है कि हम अपने अंदर सद्गुणों को धारण करे , पवित्रता का जीवन जिये, नशे मांस से मुक्त चरित्रवानों का जीवन जिये,अपने स्व धर्म का पालन करे, अपनी आत्मा पर पड़े आवरणों को हटा कर उसके नजदीक जाए, समाज की सेवा करे, दुखियों के दुखों को समझे उसे दूर करने का प्रयास करे, एक दूसरे के साथ सामंजस्य का जीवन जिये तथा धर्म रक्षा, राष्ट्र रक्षा और मानवता के लिए अपना जीवन समर्पित करें।

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