सामाजिक कार्यकर्ता संतोष उपाध्याय की मां का निधन, घर में शोक की लहर


संवाददाता: पारसनाथ दुबे 


डेहरी रोहतास। क्षेत्र के जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता संतोष उपाध्याय की माताजी का निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही घर में कोहराम मच गया और पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। 


संतोष उपाध्याय के लिए यह अपूरणीय क्षति है। मां का साया सिर से उठ जाना जीवन का सबसे बड़ा खालीपन होता है। "बेटा खाना खा लो" ये तीन शब्द ही मां की पूरी दुनिया होते हैं। घर लौटने पर सबसे पहले यही आवाज़ सुनने की आदत होती है। अब जब वो आवाज़ नहीं मिलेगी तो घर का हर कोना सूना लगेगा। 


बताया जाता है कि उनकी माताजी धार्मिक विचारों वाली थीं। उन्होंने संतोष जी को संस्कार और सेवा का जो पाठ पढ़ाया, वो अब उनके कर्मों में जिंदा रहेगा। एक सामाजिक कार्यकर्ता के लिए मां का जाना दोहरी पीड़ा है। वो दूसरों के दुख बांटता है, पर अपने दुख में उसे कौन संभालेगा। 


स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने गहरी संवेदना व्यक्त की है। सभी ने ईश्वर से प्रार्थना की है कि दिवंगत आत्मा को शांति मिले और संतोष उपाध्याय जी को यह असीम दुख सहने की शक्ति मिले। मां की यादें ही अब सबसे बड़ा सहारा हैं।

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