भू-माफिया, अवैध वसूली, तस्करी, सहित अन्य अवैध कार्यों में, पद पर आसक्त अधिकारियों की मिलीभगत से नहीं किया जा सकता इंकार
- कुमार चन्द्र भुषण तिवारी, उप संपादक बिहार
- Jun 05, 2026
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शासनिक प्रशासनिक अधिकारियों सहित विभाग के 99% कर्मियों की भी संलिप्तता, तो हर विभाग में अवैध कर्मियों की भरमार, कट रही मौज
भुमि अतिक्रमण कराने में अधिकारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है , साथ ही अभी तक अतिक्रमण मुक्ति में बाधक है, तो न्याय पालिका भी मंत्रमुग्ध
आर्थिक लोभ में अधिकारी भू-माफियाओं से मिलीभगत कर, अतिक्रमण मुक्ति की कार्य में फंसा रहें रोड़े
बिहार-- प्रदेश में भू-माफियाओं, अवैध वसूली, तस्करी और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। यदि देखा जाए तो इन अवैध कारोबारों को संरक्षण देने में कुछ प्रशासनिक और विभागीय अधिकारियो,और सरकार में बैठे लोगो की भूमिका भी संदेहों के घेरे में है।
क्या पूर्व व वर्तमान की लेखा जोखा खंगालने से यह स्पष्ट नहीं है कि भू-माफियाओं द्वारा भुमि अतिक्रमण कराने में अधिकारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है, साथ ही अतिक्रमण मुक्त कराने में बाधक बने हुए है।
यदि कानूनत: देखा जाए तो राजस्वकर्मियों समेत राजस्व के अधिकारियों द्वारा स्वत: संज्ञान ले प्रथम दृष्टया भूमि को अतिक्रमण नहीं होने देना चाहिए, और यदि कोई कर भी लिया तो अतिक्रमण मुक्त कराया जाना चाहिए। पर सदैव यह देखने को मिलते आया है की यदि कोई समाज सेवक, स्थानीय निवासियों समेत पर्यावरण प्रेमियों द्वारा जब अधिकारियों के संज्ञान में भी दिया जाता है, तो कर्मियों समेत अधिकारियों द्वारा भी अर्थ की उगाही कर मामले को टाल मटोल किया जाता है। प्रदेश में देखा जाएं तो हजारों ऐसे मामले देखने को मिलेगा की मामला हाईकोर्ट में पहुंच कर भी लंबित है। स्थानीय कर्मियों अधिकारियों सरकार से तनख्वाह प्राप्त करने वाले वकील आखिर क्या कर रहे हैं। वही देखा जाए तो न्यायालय भी इन सभी के वशीभूत हो मंत्रमुग्ध हो गया है। जिससे की ऐसा प्रतीत होता है कि भू-माफियाओं से कर्मियों समेत ऊंच अधिकारियों की भी मेल जोल है।
जब सरकार बैठे लोग ही अपराध की दुनिया , भू माफिया, तस्करी अवैध कारोबार की दुनिया, से सफर कर सत्ता की कुर्सी तक पहुंचे हो तो यह सब होना तो स्वाभाविक है।कभी-कभी ईमानदार अधिकारी भी सरकार में बैठे लोगों के दबाव में अनुचित कार्य कर बैठते है, वो भी अपनी नौकरी बचाने के लिए, इस परिदृश्य पर भी बारीकी से नजर डालना होगा। यदि एक तरफा आरोप लगाया जाए तो बेईमानी होगी। जब पर्वत पर बरसात होती हो तो उसका पानी नीचे आना स्वाभाविक है, यही हाल सरकार में बैठे लोग और नीचे में बैठे पदाधिकारीयों की है। जब सरकार में बैठे लोग अपने लिए पदाधिकारी से मिलकर लुट करायेंगे और पैसा कमाएंगे जमीन को कब्जे में लेंगे अतिक्रमण करेंगे तो अधिकारियों को सरकार में बैठे लोगो से ज्यादा कमाना और अवैध कारोबार करना स्वाभाविक है। जानकारों का कहना है कि यदि सरकार में बैठे लोग और प्रशासन के पदों पर बैठे लोग पूरी ईमानदारी और निष्पक्षता से कार्रवाई करे, तो अवैध कब्जे, भूमि घोटाले और तस्करी जैसी गतिविधियों पर अंकुश लगाया जा सकता है। लेकिन कई मामलों में सरकार में बैठे लोग, अधिकारियों और अवैध कारोबारियों के बीच मिलीभगत की आशंकाएं सामने आती रही हैं।
सूत्रों के अनुसार, कई विभागों में मंत्रालयों में नियमों को ताक पर रखकर काम किया जा रहा है। आरोप यह भी है कि कुछ अधिकारी आर्थिक लाभ के लालच में भू-माफियाओं के साथ सांठगांठ कर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में बाधाएं खड़ी करते हैं। इससे सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा करने वालों के हौसले बुलंद होते हैं और आम जनता को न्याय मिलने में कठिनाई होती है।
वहीं, विभागीय व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। चर्चा है कि कई विभागों में बड़ी संख्या में अवैध लोग सक्रिय हैं, जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अवैध गतिविधियों को बढ़ावा देने में लगे हुए हैं, यदि सूत्रों की मानें तो ऐसे धंधेबाज के माध्यम से अधिकारियों द्वारा भी मौज उड़ाया जा रहा है।
हालांकि, इन आरोपों की निष्पक्ष जांच और सत्यापन आवश्यक है। जनता अब यह जानना चाहती है कि आखिर अवैध कारोबारों पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए प्रशासन और सरकार में बैठे लोग कब और क्या ठोस कदम उठाएगा या यह सब यू ही चलता रहेगा।


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