साहित्यकार और मंच एक दूसरे के पर्याय हैं
- सुनील कुमार, जिला ब्यूरो चीफ रोहतास
- Jun 26, 2026
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रोहतास।नशा निरोधक दिवस पर नशा नहीं करने की अपील करते हुए युवाओं को दुर रहने की नसीहत काशी काव्य संगम रोहतास जिला संयोजक साहित्यकार सुनील कुमार रोहतास ने दी। आगे उन्होंने साहित्यकार के बारे में बताते हुए कहते हैं कि साहित्यकार एवं मंच एक दूसरे के पर्याय हैं।इस कथन में गहरा अर्थ छिपा है।।साहित्यकार बिना मंच अधूरा है।कवि या लेखक की रचना जब तक श्रोता तक नहीं पहुंचती, वह कागज पर दबी रह जाती है। मंच ही उसे आवाज़, सांस और पहचान देता है। तुलसी, कबीर से लेकर आज के कवियों तक, सब मंच से ही जन-जन तक पहुंचे।
मंच बिना साहित्यकार सूना है।मंच की रौनक, उसकी आत्मा, साहित्यकार के शब्दों से ही बनती है। माइक, लाइट, कुर्सियां रख देने से मंच नहीं बनता। उसे जीवंत बनाता है कवि का भाव, लेखक का विचार।
संवाद का सेतु है।साहित्यकार समाज की पीड़ा, खुशी, विद्रोह लिखता है। मंच उस लिखे हुए को लाखों कानों तक पहुंचाता है। एक लिखता है, दूसरा सुनाता है। दोनों मिलकर ही बदलाव की चिंगारी बनते हैं।
एक-दूसरे के पूरक हैं।साहित्यकार रचना गढ़ता है, मंच उसे परखता है। श्रोता की तालियां या चुप्पी ही बताती है कि शब्द में कितना दम है। मंच पर ही साहित्यकार को अपनी रचना का असली मूल्य पता चलता है।
साहित्यकार दीपक है तो मंच बाती। दीपक में तेल हो पर बाती न हो तो उजाला नहीं होगा। और बाती हो पर तेल न हो तो भी अंधेरा रहेगा। इसलिए कहा जाता है।रचनाकार के बिना मंच खाली है, और मंच के बिना रचनाकार अधूरा है।कवि सम्मेलन, मुशायरे, साहित्य उत्सव इसी रिश्ते की सबसे सुंदर मिसाल हैं ।


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