स्पीडी ट्रायल में अपहरण एवं गैंगरेप के चार दोषियों को उम्रकैद, 46 हजार रुपये जुर्माना

संवाददाता रूपेश कुमार दुबे की रिपोर्ट 

कैमूर------- भभुआंं व्यवहार न्यायालय पॉक्सो एक्ट के विशेष न्यायाधीश सह एडीजे-6 प्रमोद कुमार पांडेय की अदालत ने बुधवार, 19 अगस्त 2026 को अपहरण एवं सामूहिक दुष्कर्म के एक महत्वपूर्ण मामले में फैसला सुनाते हुए चार दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह मामला स्पीडी ट्रायल पॉक्सो वाद संख्या 59/2024 एवं महिला थाना कांड संख्या 19/2024 से संबंधित है।

अदालत ने मामले में चैनपुर थाना क्षेत्र के सहेवांहे गांव निवासी मोती कुमार उर्फ मूर्ति, पिता मिश्री बिंद, मोहन कुमार, पिता रामवाज बिंद, सुखु विंद, पिता मिठू बिंद और विकास कुमार, पिता नारायण बिंद को दोषी करार दिया। चारों पर 16 वर्षीय छात्रा के अपहरण कर सामूहिक दुष्कर्म करने का आरोप था।

अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 376 एवं पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत चारों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। इसके अलावा धारा 366/34 के तहत छह वर्ष, धारा 506/34 के तहत एक वर्ष तथा धारा 342 के तहत छह माह की सजा सुनाई गई। अदालत ने चारों दोषियों पर कुल 46 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।

कैमूर जिला पॉक्सो एक्ट के विशेष लोक अभियोजक शशि भूषण पांडेय जानकारी देते हुए बताया कि घटना वर्ष 2024 में उस समय हुई थी, जब पीड़िता अपने घर में सो रही थी। आरोप है कि चारों अभियुक्त उसे घर से उठाकर सुनसान स्थान पर ले गए, जहां उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया।

घटना के बाद आरोपियों ने पीड़िता को धमकी दी थी कि यदि उसने घटना के बारे में किसी को बताया तो उसके पिता और भाई की हत्या कर दी जाएगी। धमकी के कारण पीड़िता काफी भयभीत हो गई और उसने तत्काल अपने परिजनों को घटना की जानकारी नहीं दी। करीब चार दिन बाद घर लौटने पर उसने अपने मामा के लड़के को पूरी घटना की जानकारी दी, जिसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा।

पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। अनुसंधान के दौरान घटना को सत्य पाए जाने के बाद आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय में आरोप-पत्र समर्पित किया गया। इसके बाद मामले का स्पीडी ट्रायल कराया गया।

विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 9 गवाहों की गवाही कराई गई तथा कई महत्वपूर्ण दस्तावेजी साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए। अभियोजन पक्ष ने साक्ष्यों के माध्यम से आरोपों को साबित करने का प्रयास किया। न्यायालय ने उपलब्ध मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों का विवेकपूर्ण तरीके से अवलोकन करने के बाद चारों अभियुक्तों को दोषी पाया।

फैसले के बाद विशेष लोक अभियोजक शशि भूषण पांडे ने कहा कि इस मामले में स्पीडी ट्रायल के माध्यम से पीड़िता को न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्रवाई हुई है। उन्होंने कहा कि त्वरित विचारण से पीड़ित पक्ष को न्याय मिलने के साथ-साथ समाज में अपराधियों के प्रति कड़ा संदेश भी गया है।

विचारण के दौरान जिला अभियोजन शाखा की ओर से भी आवश्यक सहयोग प्रदान किया गया, जिसके कारण मामले की सुनवाई तेजी से पूरी हो सकी।

न्यायालय के इस फैसले को नाबालिगों के खिलाफ गंभीर अपराधों के मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उम्रकैद की सजा और आर्थिक दंड से यह संदेश गया है कि महिलाओं एवं नाबालिगों के साथ होने वाले गंभीर अपराधों में दोष साबित होने पर कानून के तहत कड़ी सजा दी जा सकती है।

कैमूर में स्पीडी ट्रायल के तहत आए इस फैसले ने पीड़ित पक्ष को न्याय दिलाने के साथ-साथ गंभीर अपराधों के खिलाफ कानून की सख्ती का भी संदेश दिया है।

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