एल्गोरिदम से आगे: विकेंद्रीकृत प्रत्यक्ष जांच ही भारत की मतदाता सूचियों को कैसे तय करती है?
- महेंद्र कुमार (गुडडू), ब्यूरो चीफ भिवंडी
- Oct 08, 2026
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चुनाव आयोग की ओर से गलत जानकारी का खंडन: कानूनी नियम, विकेंद्रीकृत व्यवस्था और जमीनी जांच भारतीय चुनावों की सुरक्षा कैसे करते हैं
मतदाता सूची में बदलाव, अंदरूनी निर्णय प्रक्रिया और मतदान की डिजिटल व्यवस्था को लेकर लगाए जा रहे कई तरह के आरोपों का जवाब देते हुए भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने मतदाता सूची और मतदान प्रक्रिया से जुड़े कानूनी, तकनीकी और संस्थागत सुरक्षा उपायों के बारे में जानकारी दी है। कई विस्तृत स्पष्टीकरणों के जरिए आयोग ने मुख्य विवादित मुद्दों पर अपनी बात रखी है—इनमें 'ECINET' डिजिटल प्लेटफॉर्म का कामकाज, आयोग के स्तर पर फैसले लेने की व्यवस्था, युवा मतदाताओं के पंजीकरण की प्रक्रिया और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में की जाने वाली कड़ी जांच शामिल है।
पारदर्शी प्रशासन: आयोग के फैसले कैसे लिए जाते हैं?
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) पर यह मुख्य आरोप लगाया गया था कि वे बाकी दो चुनाव आयुक्तों को नजरअंदाज करके और बैठकों के बुनियादी नियमों का उल्लंघन करते हुए एकतरफा फैसले ले रहे हैं।
इस पर आयोग ने स्पष्ट किया कि यह मुख्य चुनाव आयुक्त और दो चुनाव आयुक्तों वाली एक बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्था है। 'मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023' की धारा 18(1) के अनुसार आयोग अपने कामकाज और कार्यप्रणाली को आपसी सहमति से तय करता है। इसके अलावा:
* सर्वसम्मति से चर्चा: आयोग के सभी फैसले मिलकर लिए जाते हैं और तीनों आयुक्तों की सहमति से मंजूर किए जाते हैं। 'कामकाज के नियम' (Transaction of Business Rules) और आधिकारिक अधिकार देने वाले नियमों के अनुसार, सहमति बनने के बाद ही पत्र, नोटिस और कानूनी आदेश जारी किए जाते हैं।
* मसौदे पर चर्चा का मतलब "मतभेद" नहीं: मसौदा तैयार करते समय सवाल उठाना, स्पष्टीकरण मांगना या अपनी टिप्पणियां देना संस्थागत चर्चा का सामान्य हिस्सा है। आयोग ने कहा कि शुरुआती टिप्पणियों को अंदरूनी "हेरफेर" या "मतभेद" के रूप में पेश करना सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया को गलत तरीके से दिखाना है।
* बैठकों के तय नियम: बैठक से पहले आधिकारिक एजेंडा जारी करना और समय पर काम की समीक्षा से जुड़ी रिपोर्ट पूरी करना कामकाज में पारदर्शिता बढ़ाने की सामान्य संस्थागत प्रक्रिया है; इन्हें जल्दबाजी में किए गए किसी वादे या पहले की किसी असफलता की स्वीकारोक्ति नहीं माना जाना चाहिए।
चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करने वाली समिति को लेकर लगाए गए आरोपों पर आयोग ने स्पष्ट किया कि वर्तमान समिति में प्रधानमंत्री, एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री और विपक्ष के नेता शामिल हैं। इस समिति की मौजूदा व्यवस्था संसद ने 2023 में 'अनूप बरनवाल बनाम यूनियन ऑफ इंडिया' मामले में सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम निर्देशों के बाद कानूनी रूप से लागू की थी। 2023 से पहले सीधे कार्यपालिका की सलाह के आधार पर होने वाली नियुक्ति व्यवस्था की जगह इस समिति-आधारित व्यवस्था ने संसद के विपक्ष को भी शामिल करने वाली एक कानूनी प्रक्रिया को औपचारिक रूप दिया है।
ECINET: अधिकारियों के लिए एक सुरक्षित माध्यम, अपने आप फैसला लेने वाली व्यवस्था नहीं
'ECINET' सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल मतदाताओं के नाम अपने आप हटाने, स्थानीय चुनाव अधिकारियों के अधिकार सीमित करने या मतदाता सूची तैयार करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का इस्तेमाल करने के लिए किया जा रहा है, ऐसे व्यापक दावे किए जा रहे थे।
आयोग ने इन दावों को खारिज करते हुए प्लेटफॉर्म के वास्तविक कामकाज की जानकारी दी:
* मतदाता पंजीकरण अधिकारी (ERO) के अधिकार कायम: लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के अनुसार मतदाता सूची में नाम जोड़ने, बदलने या हटाने का कानूनी अधिकार उचित नोटिस और सुनवाई के बाद केवल नियुक्त 'मतदाता पंजीकरण अधिकारी' (ERO) के पास होता है। ECINET केवल प्रशासनिक काम और रिकॉर्ड रखने का माध्यम है; यह अपने आप किसी मतदाता की स्थिति नहीं बदल सकता।
* कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का इस्तेमाल नहीं: आयोग ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची तैयार करने या उसमें सुधार करने के किसी भी चरण में AI का इस्तेमाल नहीं किया जाता। सोशल मीडिया पर सॉफ्टवेयर आधारित प्रक्रिया को गलत तरीके से "एल्गोरिदम के जरिए मतदाताओं की छंटाई" बताया गया है।
* अधिकारियों के इस्तेमाल पर कोई रोक नहीं: यह दावा गलत है कि जमीनी स्तर के अधिकारियों को सॉफ्टवेयर इस्तेमाल करने से रोका गया है। बूथ लेवल ऑफिसर (BLO), सहायक मतदाता पंजीकरण अधिकारी (AERO), मतदाता पंजीकरण अधिकारी (ERO), जिला चुनाव अधिकारी (DEO) और मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) अपने-अपने कानूनी अधिकार क्षेत्र में व्यक्तिगत सुरक्षित लॉगिन क्रेडेंशियल का इस्तेमाल करके काम करते हैं। SIR की घोषणा के बाद पूरे देश में 109 विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए और इस दौरान अधिकारियों के सॉफ्टवेयर इस्तेमाल को लेकर कोई शिकायत या परेशानी दर्ज नहीं की गई।
* जमीनी घटनाओं की जांच और समाधान: गोवा में 97 मतदाताओं के रिकॉर्ड जैसी इंटरनेट पर चर्चा में आई कुछ घटनाओं में नाम शामिल न होने की वजह तकनीकी या एल्गोरिदम की गलती नहीं थी, बल्कि स्थानीय ERO स्तर पर हुई मानवीय गलती थी। जमीनी स्तर पर जांच के बाद BLO ने घर-घर जाकर दस्तावेजों की जांच की और योग्य मतदाताओं के नाम बाद में शामिल किए गए।
मतदाता सूची की जांच: प्रत्यक्ष जांच बनाम "वोट चोरी" का प्रचार
SIR के नाम पर छिपे तरीके से मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आरोपों का खंडन करते हुए पुनरीक्षण प्रक्रिया में कई स्तरों पर होने वाली जांच की जानकारी दी गई:
* जमीनी स्तर पर जांच: हर पुनरीक्षण प्रक्रिया में BLO घर-घर जाकर गहन जांच करते हैं।
* राजनीतिक दलों द्वारा समानांतर जांच: इस प्रक्रिया में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त लगभग 20 लाख बूथ लेवल एजेंट (BLA) शामिल होते हैं। किसी रिकॉर्ड को अंतिम रूप देने से पहले स्वतंत्र रूप से जांच की जा सके, इसके लिए मसौदा मतदाता सूची और शुरुआती ASDD सूचियां (अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और दोहरे रिकॉर्ड वाले मतदाता) सीधे राजनीतिक दलों और उनके BLA को दी जाती हैं।
* कानूनी प्रक्रिया: नाम मनमाने तरीके से या अचानक नहीं हटाए जाते। मतदाताओं को अपने दावे और आपत्तियां दर्ज करने के लिए पर्याप्त और पारदर्शी समय दिया जाता है। साथ ही, ERO के फैसले के खिलाफ औपचारिक अपील करने की व्यवस्था भी कानून में है।
* मतदान और मतगणना में पारदर्शिता: मतदान के दिन सुरक्षा के लिए कुछ तय मतदान केंद्रों पर 100% वेबकास्टिंग की जाती है। इसके अलावा संबंधित केंद्रों पर उम्मीदवारों द्वारा नियुक्त पोलिंग एजेंट और काउंटिंग एजेंट लगातार निगरानी रखते हैं।
लगातार पंजीकरण और 'जेन जी' (Gen Z) मतदाताओं की बढ़ती संख्या
युवा नागरिकों को पंजीकरण कराने में परेशानी होने या पंजीकरण के नियम बदलने की अफवाहों का खंडन करते हुए आयोग ने कहा कि अब मतदाता पंजीकरण पहले से ज्यादा आसान और व्यापक हो गया है:
* साल में चार पात्रता तिथियां: 18 वर्ष की उम्र पूरी करने वाले नागरिकों को अब पंजीकरण के लिए साल में केवल एक तारीख का इंतजार नहीं करना पड़ता। वे 1 जनवरी, 1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्टूबर इन चार पात्रता तिथियों के आधार पर पंजीकरण करा सकते हैं।
* फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं: पूरे देश में सामान्य मतदाता पंजीकरण कानूनी 'फॉर्म 6' के जरिए बिना किसी बदलाव के जारी है। SIR अभियान के दौरान इस्तेमाल किया गया अतिरिक्त घोषणा फॉर्म केवल विशेष जांच की जरूरतों के लिए अलग से जोड़ा गया था; इस कानूनी व्यवस्था को सुप्रीम कोर्ट ने मई 2026 में आधिकारिक रूप से मान्य माना है।
* युवा मतदाताओं के आंकड़े: 24 जून 2025 से 2026 की शुरुआत तक 18 से 28 वर्ष की उम्र के लगभग 2.37 करोड़ नए मतदाताओं का मतदाता सूची में पंजीकरण हुआ है—इसका मतलब है कि हर महीने करीब 16 लाख या हर दिन 50,000 से ज्यादा नए मतदाता जुड़े। देशभर में 'मतदाता साक्षरता मंचों' (ELC) द्वारा लगातार चलाए जा रहे अभियानों के कारण अब मतदाता सूची में 18 से 28 वर्ष की उम्र के कुल मतदाताओं की संख्या 17.38 करोड़ तक पहुंच गई है।
कानूनी प्रावधानों, अदालत के फैसलों और तकनीकी सुरक्षा उपायों का हवाला देते हुए चुनाव आयोग ने दोहराया कि मतदाता सूची की विश्वसनीयता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए उसकी चुनावी प्रशासन व्यवस्था विकेंद्रीकृत जमीनी जांच, मानव निगरानी और सार्वजनिक पारदर्शिता का प्रभावी मेल है।


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