कैमूर में बैंक मित्र संगठनों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर किया बैठक
- कुमार चन्द्र भुषण तिवारी, उप संपादक बिहार
- Dec 01, 2025
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कैमूर-- जिला मोहनिया में ऐतिहासिक जगजीवन स्टेडियम में आज एक महत्वपूर्ण उद्देश्य से एकत्रित हुए राष्ट्रीय बैंक मित्र फेडरेशन ऑफ इंडिया के बीसी दूर-दूर के ग्रामीण और शहरी इलाकों से यहाँ पहुंच कर लोगों को बैंक से लेकिन हम सभी से कंपनी छल रही है और हम लोग अधिकारों की लड़ाई को मजबूत करने के लिए एकजुट हुए हैं। बैंक और कंपनियों के द्वारा हमें जो भी लक्ष्य—Target दिए जाते हैं, चाहे खाता खोलने का हो, बीमा का हो, लोन रिकवरी का हो या सरकारी योजनाओं को घर-घर तक पहुंचाने का हो… हम बैंक मित्र पूरी ईमानदारी, पूरी निष्ठा और पूरी लगन से उसे पूरा करते हैं।
देश में जनधन योजना को सफल बनाने में सबसे बड़ी भूमिका किसी ने निभाई है तो वह बैंक मित्रों ने निभाई है। हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की इस ऐतिहासिक योजना को गाँव-गाँव, टोले-टोले तक पहुँचाने का काम बैंक मित्रों ने किया है। आज देश के लगभग हर परिवार का जनधन खाता खुल चुका है — यह हमारी मेहनत का परिणाम है।लेकिन साथियों, सच यह भी है कि हम मेहनत कर रहे हैं, हम लक्ष्य पूरा कर रहे हैं, लेकिन हमें हमारा हक नहीं मिल रहा है।महीनों बीत जाते हैं, भुगतान समय पर नहीं मिलता। कमीशन इतना कम है कि एक दिहाड़ी मजदूर से भी कम आमदनी हो रही है। ₹4,000–₹5,000 महीने में कमाकर हम कौन-सा परिवार चलाएँ?
बिजली बिल, दुकान का किराया, इंटरनेट, मशीन सर्विसिंग, डिवाइस रिपेयर, पेट्रोल—इन सबके बाद तो जेब में कुछ बचता ही नहीं।
क्या बैंक मित्रों का जीवन इतना सस्ता है? क्या बैंक मित्रों की मेहनत की कोई क़ीमत नहीं?
जब बैंक का कर्मचारी कम काम कर रहा है और पूरी सुविधाएँ पा रहा है, तो बैंक मित्र जो उससे दोगुना काम कर रहा है — उसे क्यों नहीं सुविधाएँ मिलनी चाहिए?
मैं सरकार और बैंकों से स्पष्ट कहना चाहता हूँ — अगर बैंक मित्रों से काम लेना है, तो हमें भी बैंक के कर्मचारियों की तरह सुविधाएँ दी जाएँ। हमारी आय का न्यूनतम मानदेय तय किया जाए। हर CSP को लाइसेंस और पूर्ण बैंकिंग सुविधा दी जाए। हमारी पेमेंट प्रणाली समयबद्ध की जाए — देर से भुगतान बिल्कुल बर्दाश्त नहीं।
साथियों, हम अपने अधिकार भी चाहते हैं, और देश को सेवाएँ देने के लिए भी प्रतिबद्ध हैं। लेकिन सेवा तभी संभव है जब बैंक मित्र का परिवार भूखा न रहे, जब बैंक मित्र को सम्मान मिले, सुरक्षा मिले और स्थिर आय मिले।
आज हम इस मंच से यह संकल्प लियाऔर चेतावनी दिया प्रबंधन और एजेंसियां हमेशा से बैंक मित्रों को उपेक्षित कर उनका आर्थिक शोषण कर रही है। इस मसले पर केंद्र सरकार हो या राज्य सरकार, पूरे संवेदना के साथ ध्यान दें। अन्यथा राज्य ही नहीं पूरे राष्ट्रीय स्तर पर हम सभी बैंक मित्र देश व्यापी आंदोलन करने पर विवश हो जाएंगे, जिसकी जिम्मेदारी प्रबंधन और एजेंसियां होंगी।


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