अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव श्रीमद्भगवद्गीता के 15वें अध्याय का सस्वर पाठ का हुआ आयोजन

वेद, पुराण जैसे हमारे प्राचीन ग्रंथों का अध्ययन अनिवार्य - कलेक्टर


 राजगढ़ । अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव श्रीमद्भगवद्गीता कार्यक्रम में परिसर का अंदिरवास अत्यंत सुंदर रूप से सजाया गया। जिससे पूरे स्थल पर एक दिव्य, शांत और आध्यात्मिक वातावरण बना रहा। कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा द्वारा कार्यक्रम में पधारे संत–साधुओं का शॉल, श्रीफल से सम्मान किया तथा परंपरागत विधि से दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस दौरान मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री इच्छित गढ़पाले, डिप्टी कलेक्टर सुश्री ज्योति राजोरे, मुख्य चिकित्सा एवं जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शोभा पटेल सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, अधिकारीगण व कर्मचारीगण एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

इस दौरान कलेक्टर डॉ. मिश्रा ने सभी को अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि वेद, पुराण जैसे हमारे प्राचीन ग्रंथों का अध्ययन अनिवार्य है, क्योंकि यही हमारी जड़ों और संस्कृति का आधार हैं। उन्होंने कहा कि गीता सनातन संस्कृति का महत्वपूर्ण अंग है और इसके 18 अध्यायों में ज्ञान, भक्ति, कर्म और योग का सार समाहित है। उन्होंने कहा कि “कर्म करो, फल की चिंता मत करो… गुरुजनों का सम्मान करो, यही जीवन की सबसे बड़ी शिक्षा है।” कलेक्टर डॉ. मिश्रा ने मध्यप्रदेश सरकार की इस पहल को समाज को जीवन-मूल्य प्रदान करने वाली उत्कृष्ट पहल बताया।कार्यक्रम में बच्चों ने उत्साहपूर्वक स्वाध्याय पत्रक का दोहरान किया, जिसने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया। पूर्व विधायक श्री रघुनंदन शर्मा ने कहा कि गीता में भगवान श्रीकृष्ण का उपदेश “जब-जब पाप बढ़ता है, तब-तब मैं जन्म लेता हूँ” आज भी समाज के लिए मार्गदर्शक है। उन्होंने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे मन लगाकर पढ़ाई करें और मेरिट सूची में अपना स्थान बनाएँ। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार हमारी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने हेतु निरंतर प्रयासरत है।भाजपा जिला अध्यक्ष श्री ज्ञान सिंह गुर्जर ने मंच पर उपस्थित संतों को प्रणाम करते हुए कहा कि हमें अपने संस्कार, अपनी जड़ों और मूल्यों से जुड़ना होगा, तभी एक विकसित राष्ट्र का निर्माण संभव है। उन्होंने कहा कि गीता में वेद, उपनिषद और जीवन दर्शन का सार निहित है।

उन्होंने कहा कि जैसे भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन के संदेह दूर किए, वैसे ही हमें भी इन ग्रंथों को आत्मसात कर आगे बढ़ना चाहिए। साथ ही कार्यक्रम में उपस्थित सभी जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, छात्र छात्राओं, संतों व पुजारियों ने श्रीमद्भगवद्गीता के 15वें अध्याय का दिव्य श्लोकों के माध्यम से सामूहिक पाठ किया। जिससे पूरे आयोजन स्थल पर दिव्यता और भक्तिभाव का वातावरण बन गया। कार्यक्रम के दौरान कलेक्टर डॉ. मिश्रा को श्रीमद्भगवद्गीता को ‘राष्ट्रीय ग्रंथ’ घोषित करने के लिए ज्ञापन सौंपा गया। अंत में अनुविभागीय (राजस्व) अधिकारी सुश्री निधि भारद्वाज ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। इसके पश्चात् सभी संतों, जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, विद्यार्थियों व नागरिकों ने सामूहिक रूप से गीता आरती का गायन किया। कार्यक्रम के समापन पर पुष्पांजलि अर्पित की गई, जिससे पूरा वातावरण भक्ति, सम्मान और आध्यात्मिकता से भर उठा। समग्र रूप से कार्यक्रम अत्यंत गरिमामय, अनुशासित और दिव्य माहौल में सम्पन्न हुआ।

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