देशद्रोह में लगे राजनेता हो या जनता देशद्रोही बयान देने वालों पर लगाम लगाने की है जरूरत
- कुमार चन्द्र भुषण तिवारी, उप संपादक बिहार
- Jan 09, 2026
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वरिष्ठ संवाददाता श्याम सुंदर पाण्डेय की लेखनी से
दुर्गावती(कैमूर)-- आज के दौर में सरकार के द्वारा देश द्रोही कार्य और देश द्रोही बयान पर कोई कड़ी कार्रवाई नहीं किये जाने से देश के विरुद्ध बयान देने वाले और देश द्रोह में लगे लोगों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं। इसलिए इस पर कड़े कानून के तहत या बनाकर कार्रवाई होनी चाहिए और देश द्रोह जैसे मुद्दे पर राजनेताओं को भी नहीं बक्सा जाना चाहिए तब जाकर देशद्रोह जैसे कार्य में संलग्न लोगों पर रोक लग सकती है अन्यथा ऐसी गतिविधियों और बढ़ती जाएगी। भड़काऊ बयान और भड़काऊ भाषण देने के लिए क्या संविधान राजनेताओं को छूट देता है यदि संविधान छूट देता है तो देशद्रोह की परिभाषा क्या बनाया है संविधान,संविधान ने आम जनता के लिए केवल देशद्रोह का कानून बनाया है। देश विरोधी समाज विरोधी मुद्दों पर राज नेताओं को छुटा सांड की तरह छोड़ना क्या देश के लिए घातक नहीं है।जिस देश का राज नेता भेदभाव युक्त कानून बनाता हो और जहां के राजनेता भेद भाव युक्त राजनीति करते हो भाषण देते हो क्या उसे देशद्रोह से कानून से अलग समझ जाना चाहिए ऐसा संविधान कहता है। आम जनमानस को इन सब मुद्दों पर विचार करना चाहिए कि उस देश में कभी एकता आ सकती है, जब एकता ही नहीं रहेगी तो विपत्ति और दुख मय काल में दूसरे राष्ट्रों से कैसे लड़ेगी जनता और कैसे होगा उस देश का कल्याण। इस देश के राजनेता नफरत के सिवा एकता के लिए कभी पहल ही नहीं किए न कोई सरकारे कानून बनाई जिससे आपसी भाईचारे का संदेश देश में जाए। जहां किसी जाति विशेष को अधिकार दिए जाते हो तथा किसी जाति विशेष को जमीन अधिग्रहण करने का अधिकार दिया जाता हो और किसी जाति विशेष को मेरिट के बाद भी नौकरी में प्रवेश करने पर रोक लगा दिया जाता हो तथा जहां बिना जांच किए किसी एक खास वर्ग के कहने पर किसी खास वर्ग को जेल में भेज दिया जाता हो उसे यहां के राजनेता और जनता संविधान कहती है क्या यह उचित है। जो संविधान संशोधन करके बनाया गया हो और समाज में नफरत पैदा करता हो और समाज बांटता हो और अपमानित करने की भावना पैदा करता हो क्या उसे संविधान कहा जाना चाहिए। इसलिए वर्तमान समय के बुद्धिजीवी राजनेता और सरकार इन सब मुद्दों को देखते हुए समान नागरिकता का अधिकार यानी एक राष्ट्र एक कानून के अधिकार को लागू करना चाहिए ताकि नफरत फैलाने वाले देशद्रोह में लगे लोगों पर कार्रवाई की जा सके तथा आपसी भाईचारा कायम हो सके।


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