शारदीय (खरीफ) महाअभियान 2026, किसानों को प्राकृतिक खेती व संतुलित उर्वरक उपयोग का दिया गया प्रशिक्षण
- कुमार चन्द्र भुषण तिवारी, उप संपादक बिहार
- Jun 10, 2026
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संवाददाता रूपेश कुमार दूबे की रिपोर्ट
कैमूर--- कुदरा प्रखंड मुख्यालय परिसर में प्रखंड स्तरीय शारदीय (खरीफ) महाअभियान 2026 का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिकों एवं कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को आधुनिक एवं प्राकृतिक खेती के विभिन्न पहलुओं की जानकारी देते हुए उत्पादन बढ़ाने के लिए संतुलित उर्वरक उपयोग पर विशेष जोर दिया।
कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र अधौरा, कैमूर के मृदा विशेषज्ञ डॉ. मनीष कुमार, आत्मा कैमूर के सह परियोजना निदेशक नवीन कुमार सिंह सहित प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। इस दौरान किसानों को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, उर्वरकों के संतुलित प्रयोग, प्राकृतिक खेती तथा सरकार द्वारा संचालित कृषि योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई।
डॉ. मनीष कुमार ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखने के लिए रासायनिक उर्वरकों का संतुलित उपयोग आवश्यक है। उन्होंने बताया कि मिट्टी परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से उत्पादन बढ़ता है और खेती की लागत भी कम होती है। साथ ही किसानों को प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि आने वाले समय में सरकार का लक्ष्य कृषि क्षेत्र में 25 प्रतिशत प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना है।
उन्होंने किसानों को पराली एवं पुआल नहीं जलाने की सलाह देते हुए बताया कि इसके जलने से मिट्टी का तापमान बढ़ जाता है, जिससे मिट्टी में मौजूद सूक्ष्म जीवाणु, केंचुए एवं अन्य लाभकारी जीव नष्ट हो जाते हैं। इसके अलावा मिट्टी में पहले से कम मात्रा में उपलब्ध जैविक कार्बन भी जलकर समाप्त हो जाता है, जिससे भूमि की उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है और उत्पादन क्षमता घटती है।
सह परियोजना निदेशक नवीन कुमार सिंह ने किसानों को विभागीय योजनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है। किसानों को इन योजनाओं का लाभ उठाकर आधुनिक तकनीकों को अपनाना चाहिए। उन्होंने खरीफ मौसम में धान एवं दलहनी फसलों की वैज्ञानिक खेती के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी।
बैठक के दौरान किसानों ने कृषि संबंधी समस्याओं एवं जिज्ञासाओं को कृषि वैज्ञानिकों के समक्ष रखा, जिनका समाधान विशेषज्ञों द्वारा किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक एवं प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक बनाना तथा कृषि उत्पादन में वृद्धि के लिए नवीन तकनीकों की जानकारी उपलब्ध कराना था।
किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे उन्हें खेती में नई तकनीकों एवं सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त हुई, जिसका लाभ भविष्य में खेती को अधिक लाभकारी बनाने में मिलेगा।


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