बड़े ही हर्षोल्लास भक्ति भावना पूर्ण हुआ सरस्वती पूजा, शांति व सद्भावना पूर्ण किया गया मूर्ति विसर्जन

कैमूर-- जिले में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी बड़े ही  भक्ति भावना पूर्ण मनाया गया सरस्वती पूजा शांति और सद्भावना पूर्ण किया गया मूर्ति विसर्जन। पौराणिक कथाओं के अनुसार मान्यता है, कि माघ शुक्ल पक्ष तिथि पंचमी के दिन ब्रह्मा जी के कमंडल से ज्ञान और संगीत की देवी सरस्वती प्रकट हुई थीं। यह पूजा बुद्धि, विद्या और वाणी का वरदान पाने के लिए की जाती है, विशेषकर विद्यार्थियों के लिए यह दिन अत्यंत पवित्र माना जाता है। सरस्वती पूजा (वसंत पंचमी) हर साल माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है। ज्ञान और कला की देवी: देवी सरस्वती को विद्या, बुद्धि, कला और संगीत की देवी माना जाता है। इसलिए, इस दिन पूजा करने से मानसिक स्पष्टता और ज्ञान प्राप्त होता है।

वसंत ऋतु का आगमन: यह दिन बसंत ऋतु के आने का प्रतीक भी है, जो सर्दियों के अंत और नई शुरुआत का संकेत देता है।पीले रंग का महत्व: इस दिन पीले रंग के वस्त्र पहनने और सरस्वती माता को पीले फूल/भोग चढ़ाने की परंपरा है, क्योंकि यह रंग समृद्धि और प्रकृति में बदलाव का प्रतीक है।शिक्षा का आरंभ: बच्चों की शिक्षा (अक्षर ज्ञान) शुरू करने के लिए यह सबसे शुभ दिन माना जाता है। 

22 जनवरी दिन बृहस्पतिवार को भक्तों द्वारा जगह-जगह मूर्ति स्थापित किया गया 23 जनवरी दिन शुक्रवार को श्रद्धा व भक्ति पूर्ण विधि विधान से पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया गया वही शनिवार को जिला के नदी तालाब जलाशयों में शांति व सौहार्दपूर्ण वातावरण में प्रतिमा का विसर्जन किया गया।

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