प्रकृति की मार: शिवहर में आंधी-पानी और ओलावृष्टि से गेहूं व मकई की फसल बर्बाद, किसानों के अरमानों पर फिरा पानी

ब्यूरो चीफ अंकित कुमार की रिपोर्ट 

शिवहर-- जिले में मौसम के बदले मिजाज ने अन्नदाताओं की कमर तोड़ कर रख दी है। पिछले दिनों हुई भीषण आंधी, बारिश और ओलावृष्टि के कारण खेतों में खड़ी मकई की तैयार फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। महीनों की कड़ी मेहनत और पूंजी लगाने के बाद, जब फसल कटाई का समय आया, तब कुदरत के कहर ने किसानों के चेहरे पर मायूसी ला दी है।

तरियानी और दुम्मा हिरौता में भारी तबाही

सबसे अधिक नुकसान शिवहर प्रखंड के तरियानी वार्ड नंबर 02, दुम्मा हिरौता और आसपास के क्षेत्रों में देखा जा रहा है। यहां मकई की फसलें तेज हवाओं के कारण जमीन पर बिछ गई हैं। ओलावृष्टि ने पौधों को काफी नुकसान पहुँचाया है, जिससे दाने खराब होने की आशंका बढ़ गई है।

किसान बोले- "कर्ज लेकर की थी खेती"

दुम्मा हिरौता के प्रभावित किसान सुनील सहनी (पिता: सखी चंद्र सहनी) ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि फसल कटने ही वाली थी, लेकिन इस आपदा ने सब कुछ छीन लिया। उन्होंने बताया कि:

"हमने बड़ी उम्मीदों और मेहनत से मकई की खेती की थी। फसल तैयार थी, लेकिन अचानक आई आंधी और ओलावृष्टि ने मेहनत पर पानी फेर दिया। अब लागत निकालना भी मुश्किल लग रहा है।"

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