159वीं बटालियन सीआरपीएफ ने मनाया शौर्य दिवस, शहीदों को दी श्रद्धांजलि
- कुमार चन्द्र भुषण तिवारी, उप संपादक बिहार
- Apr 10, 2026
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“9 अप्रैल वीरता और बलिदान का प्रतीक दिवस” — कमांडेंट कुमार मयंक
ब्यूरो चीफ प्रेम कुमार की रिपोर्ट
गया-- चिकपाल केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की 159वीं बटालियन मुख्यालय चिकपाल में गुरुवार को शौर्य दिवस श्रद्धा, सम्मान और गर्व के साथ मनाया गया। इस अवसर पर कमांडेंट कुमार मयंक ने देश की रक्षा में अपने प्राणों की आहुति देने वाले शहीद जवानों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम में डिप्टी कमांडेंट अमिताभ कृष्ण यादव, सहायक कमांडेंट तुलसी दास सहित अन्य अधिकारियों एवं जवानों ने शहीदों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उनके अदम्य साहस और बलिदान को याद किया।
कमांडेंट कुमार मयंक ने अपने संबोधन में कहा कि 9 अप्रैल का दिन सीआरपीएफ के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। यह दिन न केवल सीआरपीएफ बल्कि देश के सभी सुरक्षा बलों के लिए गर्व, प्रेरणा और वीरता का प्रतीक है।
उन्होंने बताया कि 9 अप्रैल 1965 को गुजरात के कच्छ के रण स्थित सरदार और टाक पोस्ट पर तैनात सीआरपीएफ जवानों ने अद्वितीय शौर्य का परिचय दिया था। उस दिन तड़के करीब 3:30 बजे पाकिस्तान की 51वीं इन्फेंट्री ब्रिगेड के लगभग 3500 सैनिकों ने “ऑपरेशन डेजर्ट हॉक” के तहत भारतीय सीमा में घुसपैठ का प्रयास किया।
इसके बावजूद सीआरपीएफ की द्वितीय वाहिनी की चार कंपनियों ने सीमित संसाधनों के बावजूद दुश्मन का डटकर मुकाबला किया और उन्हें पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। इस भीषण संघर्ष में पाकिस्तान के 34 सैनिक मारे गए और 4 को जीवित गिरफ्तार किया गया। वहीं, सीआरपीएफ के 8 जवान वीरगति को प्राप्त हुए तथा 19 जवानों को बंदी बना लिया गया।
कमांडेंट ने बताया कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद जवानों ने करीब 12 घंटे तक दुश्मन को रोके रखा और उनके नापाक मंसूबों को विफल कर दिया।
कार्यक्रम के अंत में सभी अधिकारियों एवं जवानों ने शहीदों के बलिदान को नमन करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया। इस अवसर पर सैनिक सम्मेलन का भी आयोजन किया गया, जिसमें बल के अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रसेवा की भावना को और सुदृढ़ करने पर जोर दिया गया।


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