कुदरा में कचरे का कहर, डंपिंग से भड़का ग्रामीणों का गुस्सा
- कुमार चन्द्र भुषण तिवारी, उप संपादक बिहार
- Apr 13, 2026
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आबादी और स्कूल के पास कचरा फेंके जाने से बढ़ा संक्रमण का खतरा, प्रशासन की कार्यशैली पर उठे सवाल
ब्यूरो चीफ संदीप कुमार की रिपोर्ट
कैमूर:--- जिले के कुदरा नगर पंचायत क्षेत्र में कचरा प्रबंधन को लेकर गंभीर लापरवाही उजागर हुई है। कझारघाट वार्ड संख्या 8 स्थित पुल के समीप नगर पंचायत द्वारा लगातार कचरा डंप किए जाने से स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यह डंपिंग स्थल पूरी तरह से रिहायशी इलाके के नजदीक है। यहां से महज 100 से 150 गज की दूरी पर गांव बसा हुआ है और बच्चों का एक सरकारी स्कूल भी स्थित है। ऐसे में कचरे से उठने वाली तीखी दुर्गंध और गंदगी ने लोगों का जीना दूभर कर दिया है।
स्थानीय निवासियों के अनुसार, सुबह-शाम कचरा गिराए जाने के कारण पूरे क्षेत्र में बदबू फैल जाती है, जिससे सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है। सबसे अधिक परेशानी छोटे बच्चों और बुजुर्गों को हो रही है। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि इस गंदगी के कारण क्षेत्र में संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा लगातार बढ़ रहा है। यह स्थान कुदरा-भभुआ मुख्य मार्ग पर स्थित है, जो इलाके की प्रमुख सड़कों में से एक है। इस मार्ग से प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग आवाजाही करते हैं। लेकिन कचरे की बदबू के कारण राहगीरों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई लोग तो इस रास्ते से गुजरने से भी कतराने लगे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि नगर पंचायत के सभी वार्डों का कचरा इसी स्थान पर लाकर डंप किया जा रहा है। कचरे का ढेर दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है, जिससे आसपास का वातावरण प्रदूषित हो चुका है। हवा के साथ कचरे की दुर्गंध और गंदगी पूरे इलाके में फैल रही है। स्थानीय लोगों ने कई बार इस समस्या को लेकर संबंधित अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इससे लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों ने मांग की है कि जल्द से जल्द इस डंपिंग स्थल को हटाया जाए और कचरा निस्तारण के लिए उचित व्यवस्था की जाए, ताकि लोगों को इस समस्या से राहत मिल सके। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर समस्या पर कब संज्ञान लेता है और कब तक ग्रामीणों को इस परेशानी से निजात मिल पाती है।


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