नाले की सफाई में मौत: भिवंडी पालिका के ठेकों पर उठे सवाल

जहरीली गैस से मजदूर की मौत, चार प्रभागों का ठेका बाप-बेटे को।


अधिकारी और ठेकेदार पर केस


भिवंडी। भिवंडी शहर में नाला सफाई के नाम पर चल रही कथित लापरवाही और ठेका व्यवस्था की पोल एक मजदूर की मौत ने खोल दी है। पिरानी पाडा स्थित सत्तार मेडिकल क्षेत्र में नाले की सफाई के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आने से 45 वर्षीय सफाई कर्मी सुभाष नवशा दिघे की मौत हो गई। घटना के बाद पालिका प्रशासन, ठेकेदार और सफाई व्यवस्था को लेकर शहर में भारी आक्रोश फैल गया है। शांतिनगर पुलिस ने इस मामले में चंडिका कंस्ट्रक्शन कंपनी के मालिक बाला साहेब खरात और भिवंडी पालिका के संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 106(1), 3(5) समेत गैर इरादतन हत्या और लापरवाही से मौत का मामला दर्ज किया है। एफआईआर के अनुसार, 21 मई 2026 की दोपहर करीब 2 बजे नाले की सफाई के दौरान सुभाष दिघे को बिना किसी सुरक्षा उपकरण के नाले में उतारा गया। आरोप है कि मौके पर मौजूद अधिकारियों और ठेकेदार ने न गैस जांच कराई और न ही मजदूरों को मास्क, ऑक्सीजन सिलेंडर, हेलमेट या सुरक्षा किट उपलब्ध कराई। जहरीली गैस के संपर्क में आते ही सुभाष की तबीयत बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई। मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया है कि सफाई कार्य में लगातार नियमों की अनदेखी की जा रही थी। कई बार शिकायत के बावजूद सुरक्षा मानकों को लागू नहीं किया गया। घटना वाले दिन भी मजदूरों को सीधे नाले में उतार दिया गया। घटना के बाद श्रमजीवी संगठनों ने आंदोलन छेड़ दिया। दबाव बढ़ने पर ठेकेदार ने पालिका अधिकारियों की मौजूदगी में मृतक परिवार को 10 लाख रुपये का चेक सौंपा, लेकिन स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि “मुआवजा नहीं, जिम्मेदारों की गिरफ्तारी चाहिए।”

इस पूरे मामले में भिवंडी पालिका के आरोग्य एवं स्वच्छता विभाग की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में आ गई है। जानकारी के अनुसार, पालिका की पांच प्रभाग समितियों में से चार प्रभागों का नाला सफाई ठेका एक ही परिवार के बाप-बेटे को दिया गया। प्रभाग समिति क्रमांक 1 और 3 का ठेका सुजित बालासाहेब खरात को क्रमशः 40.72 लाख और 40.71 लाख रुपये में दिया गया, जबकि प्रभाग समिति क्रमांक 2 और 5 का ठेका चंडिका कंस्ट्रक्शन कंपनी के मालिक बालासाहेब खरात को लगभग 40-40 लाख रुपये में मिला।

सूत्रों के मुताबिक, चंडिका कंस्ट्रक्शन मूलतः निर्माण कार्य करने वाली कंपनी है, लेकिन अधिकारियों की कथित मिलीभगत से उसे नाला सफाई का ठेका भी मिल गया। अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर एक ही परिवार को चार प्रभागों का ठेका कैसे दे दिया गया?सामाजिक कार्यकर्ता परमेश्वर अंभोरे ने मांग की है कि ठेका प्रक्रिया की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। उनका कहना है कि “पालिका अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रखकर एक ही परिवार को कई प्रभागों का ठेका दिया। यह पूरे सिस्टम की मिलीभगत का मामला है।”

घटना ने एक बार फिर देश में मैनुअल सीवर और नाला सफाई की अमानवीय व्यवस्था को सामने ला दिया है। सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार द्वारा बार-बार सुरक्षा उपकरणों के बिना मजदूरों को सीवर या नालों में उतारने पर रोक लगाने के बावजूद भिवंडी में नियमों की खुलेआम अनदेखी हुई। स्थानीय संगठनों ने मांग की है कि दोषी अधिकारियों और ठेकेदार की तत्काल गिरफ्तारी हो, साथ ही नाला सफाई के सभी ठेकों और भुगतान की जांच कराई जाए।भिवंडी में हुई यह मौत सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का कड़वा सच है जहां सफाई कर्मियों की जिंदगी अब भी ठेकेदारों और अधिकारियों की लापरवाही के भरोसे छोड़ दी गई है।

रिपोर्टर

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