इच्छाओं का परित्याग ही शांति का मूल है : जीयर स्वामी जी महाराज
- सुनील कुमार, जिला ब्यूरो चीफ रोहतास
- Jun 02, 2026
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वर्षा आंधी-तूफान के बावजूद श्रद्धालुओं की भीड़ डटी रही
रोहतास। प्री मानसून की असामयिक भारी वर्षा तथा आंधी-तूफान के बावजूद मउडिहरा में श्री लक्ष्मी प्रपन्न जीयर स्वामी जी महाराज के मंगलानुशासन में चल रहे श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ के छठे दिन श्रद्धालुओं की भीड़ में कोई कमी नजर नहीं आई। कथा पंडाल में जलजमाव तथा कीचड़ के बावजूद भारी संख्या में श्रद्धालु श्री जीयर स्वामी जी का दर्शन करने तथा प्रवचन सुनने के लिए डटे रहे। उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए श्री जीयर स्वामी जी महाराज ने कहा कि कामनाओं का कोई अंत नहीं है। इच्छाएं अनंत हैं। कुछ लोग नाना प्रकार के भोग-विलास के संसाधन जुटाने में व्यस्त रहते हैं। ऐसे लोगों को शांति नहीं मिलती। इच्छाओं का परित्याग ही शांति का मूल है। संसार में हमें कोई भी काम चाहे खेती हो या व्यापार अपना कर्तव्य समझकर करना चाहिए। कर्म कामना रहित होना चाहिए। संसार में रहना है तो व्यवहार तो करना पड़ेगा लेकिन वह स्वार्थ रहित होना चाहिए।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि दत्तात्रेय जी ने पिंगला नामक वेश्या को भी अपना गुरु बनाया था। उन्होंने पिंगला वेश्या से शिक्षा ग्रहण करने के उपरांत कहा कि आशा दु:ख का कारण है तथा आशा का परित्याग ही सुख का मूल है।
पकड़ लो बांह गिरधारी नहीं तो डूब जायेंगे भजन गाते हुए स्वामी जी ने कहा कि अपने आपको भगवान की भक्ति में लीन कर देना चाहिए। उन्होंने नवधा भक्ति की चर्चा करते हुए कहा कि ईश्वर से जुड़ने और आध्यात्मिक उन्नति की नौ प्रकार की विधियाँ हैं। इसका विस्तृत वर्णन 'श्रीमद्भागवत' और श्रीरामचरितमानस के 'अरण्यकांड' में मिलता है। उन्होंने कहा कि दो प्रकार की भक्ति की चर्चा ज्यादा होती है - मार्जार भक्ति तथा मर्कट भक्ति। उन्होंने कहा कि भक्त प्रह्लाद मार्जार भक्ति के उपासक थे। इसीलिए उन्हें भगवान नरसिंह तथा उनके वंशज राजा बलि को वामन भगवान की कृपा प्राप्त हुई।
उन्होंने बताया कि कश्यप गोत्रीय बावन गांव के ओझा भगवान वामन के वंशज हैं। बावन गांव का मतलब 52 गांव नहीं बल्कि भगवान वामन का गांव होता है। भगवान वामन का गांव बक्सर है। आप सभी मउडिहरा ग्रामवासी ओझा वामन भगवान के वंशज हैं।
स्वामी जी ने कहा दहेज प्रथा पहले भी था और लोग शौक से दहेज देते थे। लेकिन आजकल दहेज प्रथा एक समस्या बन चुकी है। अगर इसे नहीं रोका गया तो स्थिति बहुत भयावह हो जायेगी। उन्होंने कहा कि विवाह बहुत सोच समझकर करना चाहिए। विवाह में मर्यादा कुल जाति धर्म और गोत्र का ध्यान रखना चाहिए। वंश विस्तार हेतु संबंध स्थापित करने में शास्त्रों का निर्देश मानना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यह श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्येष्ठ मलमास में चल रही है। मलमास या अधिकमास में जप तप पूजा पाठ का ज्यादा फल प्राप्त होता है। मलमास में विवाह, जनेऊ, गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपनी जीवन नौका भगवान के भरोसे छोड़ देना चाहिए। भगवान ही भवसागर से पार लगायेंगे। प्रभु आपकी कृपा से सब काम हो रहा है करते हो तुम कन्हैया मेरा नाम हो रहा है।
भक्त पुत्र के कारण अधर्मी पिता की भी सद्गति हो जाती है। एक भक्त पुरुष अपने पितृ तथा मातृ पक्ष के सात कुलों का उद्धार कर देता है। जैसे भक्त प्रह्लाद की वजह से उनके परिवार पर नारायण के दो अवतारों - नरसिंह अवतार तथा वामन अवतार की कृपा हुई। श्रद्धालुओं को आमंत्रित करते हुए स्वामी जी ने कहा कि कल कथा के समापन के अवसर पर आयोजित भंडारे में सभी भक्त प्रसाद ग्रहण करने अवश्य पधारें। मौके पर जनार्दन ओझा, रामापति ओझा, महेन्द्र नाथ ओझा, सर्वदेव ओझा, राजगृही ओझा, तेज नारायण ओझा, रामजी ओझा, संत शरण प्रसाद, हरिओम ओझा,पन्ना उपाध्याय, शत्रुघ्न चौबे, मुन्ना चौबे, रजनीकांत उर्फ मुन्ना पाण्डेय, पप्पन ओझा, सत्येन्द्र ओझा तथा मीडिया प्रभारी डॉ अजय ओझा उपस्थित रहे।


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