जलाशयों में पर्याप्त पानी, फिर भी सूखी हैं नहरें; किसानों के साथ घोर अन्याय : सांसद सुधाकर सिंह

संवाददाता पिंटु कुमार तिवारी की रिपोर्ट 

दुर्गावती(कैमूर)-- बक्सर लोकसभा क्षेत्र के सांसद एवं पूर्व कृषि मंत्री सुधाकर सिंह ने बिहार की सिंचाई व्यवस्था की बदहाल स्थिति को लेकर मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि राज्य के प्रमुख जलाशयों में पर्याप्त जल उपलब्ध होने के बावजूद नहरों का संचालन नहीं किया जा रहा है, जिससे धान की रोपनी बुरी तरह प्रभावित हो रही है और किसान परेशान हैं।

सांसद ने कहा कि वर्तमान में रिहंद बांध में लगभग 40 प्रतिशत, बाढ़सागर बांध में लगभग 60 प्रतिशत, दुर्गावती जलाशय में करीब 60 प्रतिशत तथा मुसाखंड बांध में लगभग 60 प्रतिशत जल उपलब्ध है। इसके बावजूद नहरों में सिंचाई के लिए पानी नहीं छोड़ा जा रहा है। उन्होंने इसे सरकार की प्रशासनिक विफलता और किसानों के प्रति घोर उदासीनता बताया।

सुधाकर सिंह ने कहा कि बिहार सरकार की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार प्रत्येक वर्ष 1 जून से नहरों का संचालन शुरू होना चाहिए, लेकिन जून माह समाप्त होने के बावजूद अधिकांश नहरें या तो बंद हैं या उनमें पर्याप्त पानी नहीं छोड़ा गया है। इसका सीधा असर हजारों किसानों पर पड़ रहा है, जो समय पर धान की रोपनी नहीं कर पा रहे हैं।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि धान की रोपनी समय पर नहीं हुई तो इसका असर केवल खरीफ फसल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रबी फसल भी प्रभावित होगी। गेहूं की बुवाई में देरी होगी, उत्पादन घटेगा और राज्य की खाद्य सुरक्षा के साथ किसानों की आय पर भी संकट गहरा जाएगा।

सांसद ने कहा कि एक ओर सरकार किसानों की आय दोगुनी करने और कृषि विकास के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी ओर उपलब्ध जल संसाधनों का समय पर उपयोग सुनिश्चित नहीं कर पा रही है। यह किसानों के साथ अन्याय है और इसे किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि राज्य के सभी संबंधित जलाशयों और नहर प्रणालियों से तत्काल सिंचाई के लिए पानी छोड़ा जाए। साथ ही नहर संचालन में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय कर उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए तथा धान की रोपनी को देखते हुए युद्धस्तर पर सिंचाई व्यवस्था बहाल करने के निर्देश जारी किए जाएं।

सुधाकर सिंह ने कहा, "धान की रोपनी किसी सरकारी फाइल का इंतजार नहीं करती। यदि समय रहते किसानों को सिंचाई का पानी उपलब्ध नहीं कराया गया तो इसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार और संबंधित प्रशासनिक तंत्र की होगी। बिहार के लाखों किसानों के हितों की रक्षा के लिए सरकार को तत्काल प्रभावी कदम उठाने होंगे।"

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