डॉक्टरों से मारपीट मामले में हाईकोर्ट सख्त, पूर्व नगरसेवक रमेश म्हात्रे की जमानत रद्द
- Rohit R. Shukla, Journalist
- Jul 19, 2026
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आत्मसमर्पण के बाद 14 दिन की न्यायिक हिरासत
कल्याण। शास्त्रीनगर जनरल अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों और नर्स के साथ कथित मारपीट के मामले में मुंबई उच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए पूर्व नगरसेवक रमेश म्हात्रे समेत पांचों आरोपियों को दी गई जमानत रद्द कर दी। हाईकोर्ट के आदेश के बाद रमेश म्हात्रे ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया। इसके बाद उन्हें कल्याण जिला एवं सत्र न्यायालय में पेश किया गया, जहां अदालत ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद डॉक्टरों द्वारा घोषित कामबंद आंदोलन भी टल गया।
गौरतलब है कि गत मंगलवार को कल्याण के शास्त्रीनगर जनरल अस्पताल में एक मरीज के उपचार को लेकर विवाद शुरू हुआ था। अस्पताल में मौजूद मरीज के परिजनों और अन्य लोगों के बीच हुई कहासुनी कुछ ही देर में उग्र हो गई। आरोप है कि इस दौरान नगरसेवक रमेश म्हात्रे सहित पांच लोगों ने ड्यूटी पर मौजूद दो डॉक्टरों और एक नर्स के साथ धक्का-मुक्की, अभद्र व्यवहार और मारपीट की। घटना से अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई और कुछ समय के लिए स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित हुईं।
घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और डॉक्टरों की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार किया। हालांकि, बाद में कल्याण की अदालत ने रमेश म्हात्रे सहित सभी आरोपियों को जमानत दे दी। अदालत के इस फैसले के बाद इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) तथा विभिन्न डॉक्टर संगठनों ने तीखी नाराजगी व्यक्त की। उनका कहना था कि सरकारी अस्पताल में ड्यूटी कर रहे डॉक्टरों पर हमला गंभीर अपराध है और ऐसे मामलों में आरोपियों को तत्काल जमानत दिए जाने से स्वास्थ्यकर्मियों का मनोबल टूटता है।
डॉक्टर संगठनों ने जमानत रद्द करने और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए सोमवार से कामबंद आंदोलन का ऐलान किया था। आंदोलन की घोषणा के बाद स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ने वाले संभावित असर को देखते हुए मामला और गंभीर हो गया।
इस बीच मुंबई उच्च न्यायालय ने इस पूरे प्रकरण का स्वतः संज्ञान (सुओ मोटू) लिया। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखाड की खंडपीठ ने शनिवार को मामले की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान अदालत ने कल्याण अदालत द्वारा रमेश म्हात्रे और चार अन्य आरोपियों को दी गई जमानत पर सवाल उठाए और उसे निरस्त कर दिया। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकारी अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के साथ हिंसा के मामलों को गंभीरता से देखा जाना चाहिए।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद रमेश म्हात्रे ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया। इसके बाद पुलिस ने उन्हें न्यायालय में पेश किया, जहां अदालत ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। अन्य आरोपियों के संबंध में भी आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद डॉक्टर संगठनों ने इसे न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उनका कहना है कि स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार और प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है तथा अस्पतालों में हिंसा की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई ही ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगा सकती है। फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है और आगे की कार्रवाई न्यायालय के निर्देशों के अनुसार की जाएगी।


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