हर पंचायत में पीएलवी और लीगल एड क्लीनिक की मांग, बाल संरक्षण तंत्र मजबूत करने का आग्रह
- सुनील कुमार, जिला ब्यूरो चीफ रोहतास
- Jul 23, 2026
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संवाददाता पारस नाथ दुबे
डेहरी रोहतास।मानवाधिकार कार्यकर्ता एवं बंदी अधिकार आंदोलन के समन्वयक संतोष उपाध्याय ने बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (BALSA) के सदस्य सचिव को पत्र लिखकर राज्य की प्रत्येक पंचायत में पारा विधिक स्वयंसेवक की बहाली, लीगल एड क्लीनिक की स्थापना और पीएलवी को समय पर मानदेय देने की मांग की है। साथ ही उन्होंने बाल संरक्षण तंत्र को सशक्त बनाने पर जोर दिया है।
अपने पत्र में संतोष उपाध्याय ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में विधिक जागरूकता बढ़ाने और गरीब एवं वंचित लोगों को न्याय तक आसान पहुंच देने के लिए पंचायत स्तर पर प्रशिक्षित पीएलवी की नियुक्ति जरूरी है। उनके अनुसार अभी बाल विवाह, बाल श्रम, बाल तस्करी, बाल यौन शोषण, स्कूल ड्रॉपआउट और घरेलू हिंसा जैसी समस्याएं गांवों में बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। इनके समाधान के लिए पीएलवी समुदाय और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के बीच सेतु का काम कर सकते हैं।
- बिहार की हर पंचायत में कम से कम एक पारा विधिक स्वयंसेवक की नियुक्ति की जाए।
- प्रत्येक पंचायत में निःशुल्क कानूनी परामर्श के लिए लीगल एड क्लीनिक स्थापित किया जाए।
- : पीएलवी को ग्राम स्तरीय बाल संरक्षण समिति के गठन, बैठक और संचालन में सक्रिय जिम्मेदारी दी जाए।
- बाल विवाह निषेध, बाल श्रम उन्मूलन, पॉक्सो अधिनियम, किशोर न्याय अधिनियम, घरेलू हिंसा, महिला अधिकार और निःशुल्क विधिक सहायता पर पीएलवी को नियमित प्रशिक्षण मिले।
- आंगनबाड़ी, स्कूल, आशा, जीविका समूह, पंचायत प्रतिनिधि, पुलिस, सीडब्ल्यूसी, जेजेबी और डीसीपीयू के साथ समन्वय के लिए दिशा-निर्देश जारी हों।
- अभियान: हर पंचायत में विधिक जागरूकता शिविर और बाल अधिकार संबंधी अभियान चलाए जाएं।
मानदेय को लेकर उन्होंने मांग की कि पीएलवी को उनका भुगतान समय पर किया जाए और नियमित काम दिया जाए ताकि प्रत्येक पीएलवी को प्रतिमाह कम से कम 15 हजार रुपये की आय सुनिश्चित हो सके। उनका कहना है कि उचित मानदेय से पीएलवी की सेवा में निरंतरता बनी रहेगी और वे ग्रामीणों में अधिकारों के प्रति जागरूकता बेहतर ढंग से फैला पाएंगे।
संतोष उपाध्याय ने कहा कि पंचायत स्तर पर प्रशिक्षित पीएलवी, सक्रिय लीगल एड क्लीनिक और मजबूत बाल संरक्षण तंत्र से बाल विवाह सहित कई सामाजिक समस्याओं की रोकथाम संभव होगी। इससे गरीब नागरिकों को न्याय मिलने में मदद मिलेगी और NALSA के उद्देश्यों को भी प्रभावी तरीके से लागू किया जा सकेगा।
उन्होंने जनहित और बालहित को ध्यान में रखते हुए BALSA से इन मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई करने का आग्रह किया है।


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