डेहरी में क्रांतिकारी दिवस पर तिलक और आजाद को श्रद्धांजलि, विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प


संवाददाता पारस नाथ दुबे


डेहरी रोहतास।क्रांतिकारी दिवस के मौके पर भारतीय ब्राह्मण महासभा ने शहर के न्यू एरिया स्थित ओझा भवन कार्यालय में कार्यक्रम आयोजित कर बाल गंगाधर तिलक और चंद्रशेखर आजाद सहित अन्य अमर शहीदों को याद किया।


कार्यक्रम में क्रांतिकारियों के चित्रों पर माल्यार्पण और पुष्प अर्पित किए गए। इसके बाद शहीदों की जीवनी और विचारों पर गोष्ठी हुई। अध्यक्षता सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी इंद्रदेव चौबे ने की और संचालन विजय कुमार मिश्र ने किया।


महासभा के सुरेंद्र तिवारी ने कहा कि हमारी आजादी इन्हीं महापुरुषों की देन है। चंद्रशेखर आजाद ऐसा भारत चाहते थे जिसमें गरीब से गरीब व्यक्ति भी यह महसूस करे कि यह देश उसका है। 


वक्ताओं ने कहा कि लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के विचार आज भी प्रासंगिक हैं। "स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है" का नारा देकर उन्होंने शिक्षा, संगठन और आत्म-बलिदान पर जोर दिया। तिलक गणित, संस्कृत, ज्योतिष और वेदों के विद्वान थे। उन्होंने केसरी और मराठा अखबार निकालकर जनता को जागृत किया और गणेशोत्सव व शिवाजी जयंती की शुरुआत की।


चंद्रशेखर आजाद के बारे में बताया गया कि वे 14 साल की उम्र में असहयोग आंदोलन से जुड़े। काकोरी कांड, लाहौर षड्यंत्र और असेंबली बम कांड के जरिए उन्होंने अंग्रेजों में दहशत पैदा की और अंत तक आजाद रहे।


इस मौके पर अनिल मिश्रा, प्रेम पाठक, प्रमोद दूबे, पंकज ओझा, परमानंद दूबे, पंकज तिवारी समेत कई लोगों ने विचार रखे। कार्यक्रम में श्यामजी तिवारी, अनिल तिवारी, पं. अशोक दुबे, विकास दुबे, प्रशांत तिवारी, संतोष पांडेय, रंजीत दुबे, सुदामा दुबे, उमेश दुबे, संजीत तिवारी, ब्रजेश मिश्र, राज पांडेय, अजय पांडेय सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।

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