डेहरी रोहतास लाइट रेलवे: 73 साल के सफर के बाद 16 जुलाई 1984 को थमे थे पहिए

क्षेत्र वासियों में आशा, रोजगार के मिलेंगे अवसर 

अनुमंडल संवाददाता पारसनाथ दूबे की रिपोर्ट 

डेहरी(रोहतास)----- बिहार के औद्योगिक इतिहास की पहचान रही देहरी रोहतास लाइट रेलवे का सफर 16 जुलाई 1984 को हमेशा के लिए बंद हो गया था। 1911 में शुरू हुई यह नैरोगेज लाइन 73 साल तक क्षेत्र की लाइफलाइन बनी रही।

रेलवे रिकॉर्ड के अनुसार

इसकी शुरुआत 1907 में डेहरी रोहतास ट्रामवे कंपनी के रूप में हुई थी। 1911 में डेहरी-ऑन-सोन से रोहतास तक 38 किमी लंबी 2 फीट 6 इंच नैरोगेज लाइन पर परिचालन शुरू हुआ। रोहतास उद्योग के पूर्व कर्मचारी सुरेंद्र लाल श्रीवास्तव ने कहा कि माल गाड़ी चलने से रोहतास उद्योग के प्लांट के सामने माल ढुलाई करने के लिए रेलवे का बैगन लग जाता था जिसके चलते कंपनी का उत्पादन ढुलाई का आसानी से मजदूरों द्वारा अपलोड कर दिया जाता था।


कहा जाता है कि 1913-14 में ही इस लाइन पर 50 हजार से अधिक यात्री और 90 हजार टन माल की ढुलाई हुई थी। मुख्य रूप से चूना पत्थर, मार्बल और बांस ढोया जाता था।

बाद में रोहतास इंडस्ट्रीज ने डालमियानगर स्थित अपनी सीमेंट और पेपर फैक्ट्रियों के लिए इसे तिउरा पीपराडीह तक विस्तार दिया। कुल लंबाई करीब 67 किमी हो गई थी।

स्टेशनों में डेहरी सिटी, इंद्रपुरी, तिलौथू, बंजारी और रोहतास प्रमुख थे। लंबे समय तक यही आम लोगों के लिए आने-जाने का मुख्य साधन था।

1970 के दशक के अंत में सड़क परिवहन बढ़ने और माल ढुलाई घटने से घाटा बढ़ने लगा। आखिरकार 16 जुलाई 1984 को रेलवे ने इसे बंद करने का फैसला लिया।

डेहरी से बंजारी तक मंजूरी 

अब 40 साल बाद इस लाइन के पुनरुद्धार की चर्चा तेज है। रेलवे ने डेहरी से बंजारी तक 36.4 किमी ब्रॉडगेज लाइन को मंजूरी दी है।

रोजगार के मिलेंगे अवसर 

स्थानीय लोगों का कहना है कि लाइन शुरू होने से रोहतासगढ़ किला, तुतला भवानी और कैमूर की सैर आसान होगी और रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।

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