कैमूर के स्कूल में वेतन भुगतान पर छिड़ा विवाद, प्रोबेशन पीरियड में नियम ताक पर रखकर बांटा वेतन, दूसरी शिक्षिका का रोका
- कुमार चन्द्र भुषण तिवारी, उप संपादक बिहार
- Sep 04, 2026
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संवाददाता रूपेश कुमार दुबे की रिपोर्ट
कैमूर------ बिहार सरकार जहां एक तरफ शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए BPSC और विशिष्ट शिक्षकों की नई नियुक्तियां कर रही है, वहीं जमीनी स्तर पर प्रशासनिक पक्षपात और अनियमितताओं के मामले सामने आ रहे हैं। ताजा मामला कैमूर जिले के कुदरा प्रखंड स्थित राजकीयकृत मध्य विद्यालय भदौला का है, जहां प्रखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) कार्यालय पर नियमों की अनदेखी और पक्षपात के गंभीर आरोप लगे हैं।
मामले के मुख्य बिंदु
एक ही स्थिति, दो अलग फैसले: विद्यालय में कार्यरत विशिष्ट शिक्षिका कुमारी अलका पाठक और BPSC शिक्षिका श्रीमती स्नेहा भट्ट—दोनों स्वास्थ्य कारणों से चिकित्सा अवकाश (Medical Leave) पर गईं।
प्रधानाध्यापक का समान रुख: विद्यालय स्तर पर प्रधानाध्यापक ने दोनों शिक्षिकाओं की अनुपस्थिति विवरणी में स्पष्ट रूप से 'चिकित्सा अवकाश' दर्ज कर फाइल BEO कार्यालय भेजी थी।
नियमों का उल्लंघन: नियमावली के अनुसार 3 वर्ष के प्रोबेशन पीरियड (परिवीक्षा अवधि) के दौरान सवैतनिक चिकित्सा अवकाश देय नहीं होता। यह अवकाश 'बिना वेतन के (LWP)' स्वीकृत होना चाहिए।
पक्षपात का आरोप: 3 साल के प्रोबेशन पर चल रहीं कुमारी अलका पाठक का चिकित्सा अवकाश न केवल स्वीकृत किया गया, बल्कि उनका वेतन भी जारी कर दिया गया। वहीं, BPSC शिक्षिका श्रीमती स्नेहा भट्ट का वेतन आज तक रोक कर रखा गया है।
स्थानीय जनप्रतिनिधि का हस्तक्षेप: भदौला पंचायत के सरपंच दिलीप कुमार सिंह ने इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए कुदरा BEO को लिखित आवेदन सौंपा है।
दोहरे रवैये पर उठे सवाल
इस मामले ने विभागीय कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय शिक्षकों का आरोप है कि कार्यालय में फाइलों और नियमों के बजाय चेहरा देखकर फैसले लिए जा रहे हैं।
किस नियम या किस चिकित्सा बोर्ड के आदेश पर प्रोबेशन में रहते हुए अलका पाठक को सवैतनिक अवकाश दिया गया?
यदि प्रोबेशन के दौरान वेतन दिया जा सकता है, तो स्नेहा भट्ट का वेतन रोकने के पीछे क्या मंशा है?
उच्चस्तरीय जांच की मांग और अल्टीमेटम
शिक्षक संगठनों ने जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO), कैमूर और जिलाधिकारी (DM), कैमूर से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है।
प्रमुख मांगें:
वेतन पंजी, अवकाश पंजी और संबंधित संचिका को तत्काल जब्त कर उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
अवैध रूप से वेतन भुगतान करने वाले दोषी लिपिक और संबंधित अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई कर सरकारी राशि की वसूली हो।
पीड़ित शिक्षिका स्नेहा भट्ट का रोका गया वेतन 24 घंटे के भीतर जारी किया जाए।
यदि इस गंभीर मामले पर 7 दिनों के भीतर निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की जाती है, तो बिहार राज्य प्रारंभिक शिक्षक संघ एवं BPSC शिक्षक संघ के संयुक्त तत्वावधान में शिक्षक DEO कार्यालय (कैमूर) और BDO कार्यालय (कुदरा) के समक्ष जोरदार धरना-प्रदर्शन और तालाबंदी करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शिक्षा विभाग की होगी।


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