डेहरी में शहीद जतिन दास के शहादत दिवस पर उठी जेल सुधार की मांग, तीन प्रस्ताव पारित



संवाददाता पारसनाथ दुबे

डेहरी रोहतास।शहीद जतिन दास के शहादत दिवस पर शनिवार को श्री रामकृष्ण आश्रम, डेहरी में बंदी अधिकार आंदोलन के बैनर तले विचार-संकल्प सभा हुई। 
अध्यक्षता प्रो. दिग्विजय सिंह ने की। 
सभा में अधिवक्ताओं, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और छात्रों ने जतिन दास के बलिदान को नमन किया।
वक्ताओं ने कहा, जतिन दास की शहादत कैदियों के मानवीय अधिकारों का ऐतिहासिक प्रतीक है।
उन्होंने लाहौर षड्यंत्र केस में 63 दिनों के अनशन के बाद 13 सितंबर 1929 को प्राण त्यागे थे।
बंदी अधिकार आंदोलन के संयोजक संतोष उपाध्याय ने कहा, कैदी से व्यवहार से समाज का चरित्र पता चलता है।
उन्होंने कहा, गांधी के देश में जेलें आज भी कई जगह पाशविक व्यवस्था का प्रतीक हैं।
विचाराधीन बंदियों को हथकड़ी-बेड़ी से बांधकर कोर्ट ले जाना गरिमा के विरुद्ध है।
जेल में मुफ्त कानूनी सहायता कागजों तक सीमित है, इसे प्रभावी बनाना होगा।
जेल में बंद माताओं के बच्चों को शिक्षा, खेल और सुरक्षित माहौल मिलना चाहिए।
जेल की चारदीवारी कानून से बाहर नहीं हो सकती, वहां भी जवाबदेही जरूरी है।
सभा में सर्वसम्मति से तीन प्रस्ताव पारित किए गए।
पहला - बिहार की सभी जेलों में 13 सितंबर को 'बंदी अधिकार दिवस' मनाया जाए।
दूसरा - बिहार में निष्क्रिय मानवाधिकार न्यायालयों को सक्रिय किया जाए।
तीसरा - बिहार में स्वतंत्र जेल लोकपाल की नियुक्ति की जाए।
सभा ने संकल्प लिया कि जतिन दास के संघर्ष को जेल सुधार आंदोलन से जोड़ा जाएगा।
इस मुद्दे पर आंदोलन का शिष्टमंडल जल्द मुख्यमंत्री से मिलकर ज्ञापन सौंपेगा।
कार्यक्रम में अनूप राय, सतीश मिश्रा, विजय सिंह सहित कई नागरिक मौजूद रहे।

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