साहस और मानवता की मिसाल: राजगढ़ के तीन युवाओं ने बांध में डूबे युवक को बचाई जान, पुलिस ने किया सम्मानित

राजगढ़ । मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले के बोड़ा थाना अंतर्गत कुंवर कोटरी क्षेत्र में मानवीय संवेदना और अदम्य साहस की एक प्रेरणादायक घटना सामने आई है। गुरुवार शाम को बांध के पानी में एक युवक के डूबने की सूचना मिली थी,, लेकिन प्रशासनिक मदद पहुंचने से पहले ही तीन स्थानीय *राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक़ो* नें अपनी जान की परवाह किए बिना ही पानी में छलांग लगा दी और युवक की जान बचा ली। उनकी इस बहादुरी के लिए पुलिस प्रशासन ने उनका भव्य सम्मान किया है।

घटना का पूरा घटनाक्रम

गुरुवार शाम को कुंवर कोटरी स्थित बांध में एक व्यक्ति (अरुण सांसी) के पानी में डूबने की सूचना मिली थी। घटना की जानकारी मिलते ही बोड़ा थाना प्रभारी देवेंद्र सिंह राजपूत अपनी पुलिस टीम के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे।

स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए थाना प्रभारी ने तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को इस हादसे से अवगत कराया और बचाव कार्य (रेस्क्यू) के लिए नाव की मांग भेजी। प्रशासनिक नाव के आने में लगने वाले समय को देखते हुए, वहाँ मौजूद स्थानीय ग्रामीणों ने स्थिति की नजाकत को समझा और खुद ही मोर्चा संभालने का फैसला किया।

जान जोखिम में डालकर बचाया अरुण सांसी को

प्रशासनिक सहायता का इंतजार किए बिना, क्षेत्र के तीन साहसी युवाओं ने बिना एक पल गंवाया अपनी जान की बाजी लगा दी। इन युवाओं में शामिल हैं:

*राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के  कार्यकर्त्ता  महेंद्र वाल्मीकि (ग्राम हिनोतिया*)

*घनश्याम वर्मा (ग्राम हिनोतिया*)

हरिओम पाल (ग्राम कोटरी)

इन तीनों युवाओं ने सूझबूझ का परिचय देते हुए एक ट्रैक्टर-ट्यूब में हवा भरी और उसके सहारे बांध के ठंडे तथा गहरे पानी में उतर गए। उन्होंने अपनी सुरक्षा की परवाह किए बिना अथक प्रयास किया और पानी में डूबे अरुण सांसी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। उनकी समय पर की गई कोशिश से अरुण की जान बचा ली गई।

बोड़ा थाना पुलिस द्वारा हुआ सम्मान

स्वयसेवको के इस साहसी और सराहनीय कार्य से प्रभावित होकर बोड़ा थाना पुलिस ने उनका उत्साहवर्धन करने का निर्णय लिया।

शुक्रवार को थाने पर एक विशेष कार्यक्रम के तहत इन तीनों जांबाज युवाओं—महेंद्र वाल्मीकि, घनश्याम वर्मा और हरिओम पाल—को आमंत्रित किया गया। बोड़ा थाना प्रभारी देवेंद्र सिंह राजपूत एवं स्टाप द्वारा  उन्हें शाल, श्रीफल, पुष्प माला और स्मृति चिन्ह (शील्ड) भेंट करने के साथ-साथ मीठाई खिलाकर सम्मानित किया।

पुलिस प्रशासन और स्थानीय नागरिकों ने युवाओं के इस जज्बे की भूरी-भूरी प्रशंसा की है। यह घटना साबित करती है कि संकट के समय में जनसहयोग और युवाओं का साहस किसी की भी जिंदगी बचाने में सबसे बड़ा संबल बन सकता है।

रिपोर्टर

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