कोरोना कुंडली-------- डॉ एम डी सिंह

चला कोरोना लेने, बॉलीवुड का हाल।
अव्वल तो अमिताभ मिले, डाला उन पर जाल।।
डाला उन पर जाल ,साथ अभिषेक भी फंसे।
है ऐसा यह काल,जो सब पर फंसरी कसे ।।
कहते मुनि कविराय ,डरें न तो होगा भला।
लग गले एक बार, वह खुद जाएगा चला।।

कहां कोरोना आया,कर सबको विसभोर। 
किसको उसने धर लिया ,मचा फालतू शोर।।
मचा फालतू शोर , डींग सभी ने हांका। 
सब कहते थे चोर ,गया वह करके डांका।। 
कहते मुनि कविराय, वह मिले जाइए जहां।
सब सर पकड़ बैठे,जाएं तो जाएं कहाँ।।

पड़ा गले जिस किसीके,वह गलबहियाँ डाल।
दिवस इक्किस खाट सुला, कर रहा बुरा हाल।।
कर रहा बुरा हाल, लगा मुंह सबके जाबा।
ऐसा मचा बवाल, बंद हुए काशी-काबा।
कहते मुनि कविराय,दिल साधो करिए कड़ा।
रहे जितना चाहे ,वह गले हमारे पड़ा।।

पिला सबको वह काढा, छीन रहा है चाय।
बंद करा के खेल-कूद, 'ठठा रहा है भाय।।
ठठा रहा है भाय ,गाल उसका भी हो बंद।
अब तो वह भी जाय, बड़ा मिले उसे भी दंड।।
कहते मुनि कविराय, शाकी उसको भी बुला।
कि हो वह भी डाउन, उसको भी इतना पिला।।

सभी उसी से मांगते ,ना कुछ जिसके पास
जिसके पास है घरा ,हुआ लगाए आस।।
हुआ लगाए आस, कोहु तो मांगे उससे।
हो जाता वह पास,कोहु तो जांचे उससे।। 
कहते मुनि कविराय,संतो देखो राह अभी।
एक दिन मांगेंगे, होमियोपैथ भी सभी।।

रिपोर्टर

संबंधित पोस्ट