
मीरा भायंदर में सरकारी राशन दुकान में दाल घोटाला की आशंका
- Hindi Samaachar
- Aug 20, 2018
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मीरा रोड । काशीमीरा के मीरा गांव परिसर में सरकार द्वारा राशन की दुकानों पर गरीबो के लिए दी जाने वाली तुवर दाल के सैकड़ो खाली पैकेट मिलने से मीरा भायंदर में दाल घोटाले की संभावना व्यक्त की जा रही है।राज्य सरकार राज्य के गरीब तबको के लिए सस्ते दर पर राशन मुहैया कराती है जिसमे चावल गेंहू शक़्कर से लेकर तुवर दाल और अन्य अनाज है पर मुनाफाखोरों के चलते अक्सर देखा गया है की अच्छी क़्वालिटी के अनाज सरकारी राशन की दुकानों से गायब रहते है उनकी जगह खराब किस्म के अनाज होते है जिन्हे मजबूरन राशन धारको को खरीदना पड़ता है। काशीमीरा के मीरागांव परिसर में सैकड़ो की संख्या में तुवर दाल के खाली पैकेट सुनसान जगह पर फेके गए थे जो साबित करते है की शहर में एक और घोटाला हुआ है और अबकी बार गरीबो की दाल इस घोटाले की शिकार हुई है। बता दे की इसके पहले नई मुंबई में दाल घोटले का पर्दाफास हुआ था। तुवर दाल पर महंगाई की मार इस कदर पड़ी है की गरीबो की थाली से यह गायब हो गई है इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य शासन ने राज्य की सरकारी राशन की दुकानों पर इसकी सप्लाई शुरू की है पर अक्सर राशन कार्ड धारको की शिकायत रहती है की जब भी वे दाल के लिए इन दुकानों पर जाते है तो उन्हें एक ही जवाब मिलता है की दाल अभी आई नहीं है। सूत्रों की माने तो राशन अधिकारी और दुकानदारों की सांठगांठ के चलते सरकारी दाल निजी दुकानदारों को बेच दी जाती है जिसकी मलाई सबको बांट दी जाती है। मीरा गाँव में सैकड़ो की संख्या में मिले सरकारी दाल के खाली पैकेट को लेकर राशन अधिकारी गणेश तीरपाले गोलमोल जवाब देते दिखे उनके अनुसार जो पैकेट मिले है वो सरकारी ही है पर किस दूकान को भेजे गए थे ये बता पाने में असमर्थ है , तिरपाले ने जाँच की बात कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है जब की इस मामले की जाँच किये जाने की आवश्यकता है। गौरतलब है की काशीमीरा परिसर में स्लम एरिया है और आदिवासी इलाके है जिनको अनाज उपलब्ध कराने की जवाबदारी यहाँ के सरकारी राशन दुकानों की है साथ ही भायंदर पश्चिम में कुछ इलाके है जहा पर सरकारी अनाज की सरकारी दुकाने है जहाँ पर कार्ड धारक राशन लेने आते है। जानकारो की माने शहर में 130 राशन की दुकाने है जिनको सरकारी अनाज मिलता है और इन्ही दुकानों से लोग सस्ते अनाज की उम्मीद रखते है। सरकारी राशन की दुकानों और घोटाले का पुराना नाता रहा है जो अभी तक चला आ रहा है। स्थानीय लोगो की माने तो यदि सही मायने में जाँच की गई तो शहर के कई राशन दूकान के लायसेंस रद्द हो सकते है और कई लायसेंस धारक और अधिकारी हवालात की हवा खा सकते है। सरकार ने राशनकार्ड धारको को अलग अलग हिस्सों में बांट रखा है सफेद राशन कार्ड धारक सिर्फ इसका इस्तेमाल दस्तावेज के लिए करते है सफेद कार्ड धारकों को इसका कोई खास फायदा नही होता है और केसरिया कार्ड धारकों को अनाज मिलता है पर अधिकतर लोग खराब क्वालिटी का अनाज होने की वजह से लेने जाते ही नही और जो जाते है वे कम मात्रा और अच्छी क्वालिटी का अनाज नही होने का जिक्र करते है।ऐसे में सरकार को चाहिए कि मुनाफाखोरी पर रोक लगाने के लिए सख्त से सख्त कदम उठाए।
कैसे हुआ दाल घोटाले का पर्दाफाश
स्थानीय पत्रकार नामदेव काशिद को सूचना मिली कि मिरागांव परिसर में सरकारी राशन की दुकानों पर सप्लाई की जाने वाली तुवर दाल के सैकड़ो खाली पैकेट फेंके गए है जिसके बाद काशिद ने स्थानीय पत्रकार साथियो को इसकी सूचना दी और राशन अधिकारी उक्त स्थान पर पहुचे और मामले का जायजा लिया।मीरा भायंदर शहर में 130 सरकारी राशन की दुकानें है जिसमे से 20 दुकानों को 22 हजार किलो तुवर की दाल सप्लाई कीए जाने की पुष्टि हुई है।
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