भिवंडी के 10 अवैध इमारतों पर चला MMRDA का बुलडोजर.250 परिवार बेघर

भिवंडी।। भिवंडी शहर तथा ग्रामीण परिसर में लगातार भू माफियों द्वारा अवैध इमारतों का निर्माण कार्य जारी है.स्थानिक शासन व प्रशासन के अधिकारी इन अवैध इमारतों पर कार्रवाई करने के नाम पर शिकायत कर्ताओ को ठेंगा दिखा देती है अथवा उन्हें हफ्ता उगाही जैसे संगीन अपराध में फसवा कर भू माफियों द्वारा प्रताड़ित किया जाता रहा है.इस खेल में शासन प्रशासन तथा बिल्डर की आपसी सांठगांठ होने से इनकार नहीं किया जा सकता है ? किन्तु जिंदगी भर रत्ती रत्ती जमाकर, खून पसीने, मेहनत से कमाई गयी दौलत से खरीदा गया मकान जब शासन व प्रशासन के वही आला अधिकारी बुलडोजर लगा कर तोड़ देते है तो उस मकान में रहने वालो‌ का जीवन पूरी तरह से तबाह हो जाता है ऐसे ही एक घटना भिवंडी के कशेली ग्राम पंचायत में घटित हुई है इस ग्राम पंचायत में बनी 10 अवैध इमारतों को उच्च न्यायालय मुंबई ने तत्काल तोड़ देने के लिए MMRDA को आदेश दिया है.इन 10 इमारतों में लगभग 250 परिवार रहते है।

मीन मालिक  व बिल्डर में था विवाद : 

कशेली ग्राम पंचायत सीमा अंर्तगत जमीन मालिक सुनीता मदरानी के भूखंड पर पद्मावती डेव्हलपर्स ने 10 इमारतें बनाई है.इन इमारतों में मध्यवर्गीय परिवार के लोगों ने घर खरीदा है.किन्तु जमीन मालिक और बिल्डर में विवाद हो गया.जिसके कारण जमीन मालिक ने बिल्डर तथा बनी इमारत के खिलाफ मुंबई उच्च न्यायालय में याचिका दाखल किया था.‌उच्च न्यायालय में सुनवाई के बाद इमारतों को अवैध घोषित कर तत्काल तोड़ देने के लिए MMRDA आयुक्त आर. ए. राजीव को आदेश दिया.तथा तोड़क कार्रवाई कर 06 अप्रेल तक अहवाल सादर करने के लिए आदेश भी दिया है।
     
MMRDA के अधिकारियों ने नारपोली पुलिस स्टेशन से पुलिस बंदोबस्त लेकर इमारतों में रहने वाले सभी घरों को खाली करवाया तथा समान को बाहर निकाला है.खाली मकानों को जेसीबी व पोखलन लगाकर तोड़ने की कार्रवाई शुरू की है.अचानक हुए कार्रवाई से रहवासियों में भय व्याप्त है। किन्तु आश्चर्य की बात है कि इस वैश्विक महामारी कोरोना में ‌शासन ने सभी नागरिकों को अपने घरों में रहने के लिए आदेश दिया है वही पर लगभग 250 परिवारों को बेघर कर तथा सैकड़ों पुलिस बल के जवानों को‌ इकठ्ठा कर क्या साबित किया जा रहा है. इस प्रकार का सवाल पीड़ित परिवार के लोगों द्वारा उठाया जा रहा है।. 

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