नाग पंचमी----डॉ एम डी सिंह

नाग 
मनोदशा है 
विषवमनी जिह्वा पर बैठ 
फुफकार रहा जो निरन्तर
काल कराल विकराल
विषैला करने को आतुर
हमारे पंचशील जीवन को

दुग्ध
चेतना है
शुभ्र शीतल सहज सरल
अतुल्य भावना का प्रतीक
तत्पर शमित करने को 
कटु कलुष गरल युक्त 
हमारे दिग्भ्रमित आचरण को

लावा
उत्साह है
तोड़कर निकला है जो
अंतर तमस का मायाजाल
वह प्रकाशपुञ्ज का श्वेत सार
उत्सुक अनवरत देने को जन्म
हमारे भीतर अनांकुरित महाप्राण को

रिपोर्टर

संबंधित पोस्ट