धान की फसल की बढ़ती लागत के कारण भूमि हुई विरान

भिवंडी।। कोंकण क्षेत्र के जिले रायगढ़, ठाणे और पालघर में मुख्य रूप से धान की फसल उगाने ले लिए जाना जाता है.किन्तु औद्योगीकरण के कारण पिछले आठ से दस वर्षों में कृषि श्रम, कृषि उपकरण, उर्वरक, बीज, कीटनाशक दवाइयां आदि की लागत दोगुनी हो गई है.धान की फसल अब किसानों को नुकसान देह का कारण बन चुका है.जिसके कारण सैकड़ों एकड़ खेत विरान पड़े हुए है।                     
भिवंडी तालुका में स्थित जुनांदुखी (निंबाडा) गांव के किसान रघुनाथ पाटिल ने सरकार से कृषि की खेती के लिए किसानों को पर्याप्त वित्तीय सब्सिडी प्रदान करने की मांग की है.वही किसान रघुनाथ पाटिल ने किसान तथा धान की फसल के बारे में दुःख प्रकट करते हुए कहा कि बचपन से खेती में काम करते आ रहे है.उन्हें खेती करने के लिए किसी चीज की परेशानी नहीं उठानी पड़ती थी.खेत में काम करने के लिए मजदूर भी आसानी से मिल जाते तथा खेतों में कड़ी मेहनत करते.मजदूर भी खेतों में काम करने करने के लिए रूचि रखते.जिसके कारण 15 वर्षों से घरेलू खेती के साथ 30 एकड़ में धान की फसल करते हुए आ रहे है.इसके साथ ईटभट्टी का व्यवसाय भी शुरू रखा हुआ है.
         
किसान रखुनाथ पाटिल ने इस साल भी 30 एकड़ धान लगाया है.इसके लिए उन्होंने 15 दिनों के लिए 36 लोगों को रोजगार दिया था.उनमें से 4-5 मजदूर हर दिन काम से गैर हाजिर रहते.पूछने पर मजदूरों बेरूखी बात करते हुए सीधे कह देता है कि एक दिन घर पर रह जाने से क्या होगा ? कुछ लोग किसान से पैसे लेते हैं और उससे कहते हैं कि हम काम पर आएंगे. किन्तु काम पर ना आकर गोदाम पट्टों में काम करने के लिए चले जाते है उन्हे वहां ज्यादा पैसा मिलता है इस बारे में उनसे बात करों कि उनका सीधा जबाब होता है और कुछ ज्यादा कहने पर काम पर नही आने की धमकी भी देते है.यही कारण है कि आज 70% कृषि भूमि पर खेती नहीं होने के कारण वीरान पड़ी हुई है.इन जमीनों पर धान के जगह बड़े बड़े घास उग आऐ है।

अब छोटे किसान तथा मजदूर सीधे कहते है हमें खेती करने की जरूरत नहीं है सरकर केवल 100 रुपये में प्रतिमाह अनाज देती है.जिससे उनके परिवार का उदर निवार्ह हो जाता है.माध्यम वर्गीय किसान इसके बारे में कुछ नहीं कहता.सरकार उन्हें जितना संभव हो उतना अनाज प्रदान करे.छोटे परिवार को प्रतिमाह 10-15 किलों अनाज लगता है.वही पर बड़े परिवार को 20-25 किलो अनाज की आवश्यकता पड़ती है अगर लोगों को अनाज सस्ते भाव में नहीं मिलता तो आज अनाज की कीमत लोगों को मालूम पड़ती.लोग मेहनत से पैसा कमाते.अगर किसान नहीं है तो व्यक्ति गोदाम कारखाने में काम करके खाता अगर किसान है तो वह व्यक्ति सुबह उठकर खेती पर काम के लिए जाता जिसके कारण खेतों में घास के स्थान पर आज धान की फसक लहराते और देश को समृद्ध बनाता। सरकार से मांग करते हुए कहा कि किसानों को न्याय मिलना चाहिए इसके लिए सरकार को अब कठोर कदम उठाना होगा.इस प्रकार से किसान रघुनाथ पाटिल ने किसान तथा खेत का दुःख व्यक्त करते हुए हमारे प्रतिनिधि से बात की है। 

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