
भिवंडी पालिका के कर मूल्यांकन विभाग में विवादित संपत्तियों के लगभग 7 हजार फ़ाइले पेंडिग !
- महेंद्र कुमार (गुडडू), ब्यूरो चीफ भिवंडी
- Nov 11, 2022
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भिवंडी।। भिवंडी निजामपुरा शहर महानगर पालिका के अधिकांश विभागों में भष्ट्राचार अपने चरम स्थान पर है। यहां अधिकारी कर दाताओ से टैक्स लगाने से लेकर विभिन्न कामों के बदले खुलेआम रिश्वत की मांग करते है रिश्वत की मांग पूरी नहीं होने पर उनके फ़ाइलों को जानबूझकर दबाकर रखी जाती है। रिश्वत मिलने के बाद ही उनकी फ़ाइलों को आगे उच्च अधिकारियों के पास भेजा जाता है। मुख्यालय में बैठे अधिकारी को अगर रिश्वत नही मिली तो उनकी फ़ाइलों में कमियां बताकर वापस उनके गंतव्य स्थान को भेज दी जाती है। जिसके कारण अनेक नागरिकों को एक एक साल तक पालिका के कर मूल्यांकन विभाग में चक्कर काटने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इसी कार्यालय के लिपिक पद पर काम करने वाले महेन्द्र रेरा ने बताया कि इस प्रकार की फ़ाइलों की आंकड़ा लगभग 7 हजार है, जो कई महीने से पेंडिग है। जिसमें दुबारा नोंद, एक ही मकान को दो बार टेक्स पार्वती आना, अस्तित्व में संपत्ति ना होने के बाद टैक्स आना, संपूर्ण इमारत के दिगरबाद अथवा बंटवारा करने के बाद भी मूल मकान पर टैक्स आना, एक ही संपत्ति को दो दो अलग अलग व्यक्तियों के नाम पर होना, एक ही संपत्ति को दो नंबर जारी कर असिमेंट होना जैसे इत्यादि पालिका व कर दाताऔ के बीच विवादित संपत्तियों का समावेश है। सुत्रों की माने प्रभाग समिति क्रमांक एक में झोपड़ा व पक्का नंबर मिलाकर लगभग 22 हजार संपत्तियां दुबारा नोंद अथवा डिमोलिश संपत्तियों पर टैक्स चालू है। जिसके कारण कुल डिमांड रकम 203 करोड़ रूपये पहुँच चुका है। इसमें लगभग 92 करोड़ रूपये ब्याज और 22 करोड़ रूपये जो झोपडे़, इमारतें टूटे अथवा तोड़ दिये गये है उनके भी टैक्स का समावेश है। इसी तरह प्रभाग समिति क्रमांक दो का डिमांड लगभग 98 करोड़ रूपये और विवादित संपत्तियों के मामले 7 हजार फाईले,प्रभाग समिति क्रमांक तीन का डिमांड लगभग 100 करोड़ और विवादित संपत्तियों के 11 हजार फ़ाइले, प्रभाग समिति क्रमांक चार की डिमांड लगभग 100 करोड़ और विवादित संपत्तियों के 7 हजार फ़ाइले और प्रभाग समिति क्रमांक पांच की डिमांड लगभग 70 करोड़ और विवादित संपत्तियों के प्रकरण की फ़ाइले लगभग 5 हजार है। जिसके कारण पालिका का डिमांड रकम लगभग 30 प्रतिशत बढ़ गया है। जिसकी वसूली नहीं हो पाती है। ऐसे संपत्तियों पर ब्याज की रकम बढ़ने से डिमांड की रकम प्रत्येक वर्ष उछाल मार रही है। जिसकी वसूली नहीं हो पाती है। जिसका खामियाजा भूभाग लिपिक सहित कर निरीक्षक को भुगतना पड़ता है। इस संबंध में कर मूल्यांकन व कर निर्धारण विभाग प्रमुख सुधीर गुरव से संपर्क करने की कोशिश की गई किन्तु उन्होंने मोबाइल फोन नहीं उठाया।
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