
तोड़ दिये गये ठेले, उजाड़ दी गई दुकानें कर्ज का कैसे करें भुगतान
- महेंद्र कुमार (गुडडू), ब्यूरो चीफ भिवंडी
- Dec 28, 2023
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भिवंडी।। भिवंडी शहर महानगर पालिका के अतिक्रमण विभाग ने अतिक्रमण के नाम पर छोटे व्यवसायियों, फुटपाथ विक्रेताओं के साथ साथ ठेला गाडियां पर पिछले दो माह से कहर बरपा रही है। जिसके कारण कई छोटे व्यवसायी, ठेला गाड़ी लगाकर अपनी जीविका चलाने वाले आज भुखमरी के कगार पर खड़े है। पालिका प्रशासन के आला अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक अपनी क्रूरता का परिचय देते हुए इनके ठेला गाड़ी जहां तोड़ रही है, वही पर ठेले से समान, फल- फूल, सब्जियां सड़कों पर फेंक देती है। शहर के मुख्य बाजार तीनबत्ती, कासर अली, नझराना, वाणीअली, प्रभुअली आदि क्षेत्रों में अतिक्रमण के नाम पर प्रशासन ने कई साल पुरानी दुकानों को जेसीबी के सहायता से तोड़ दिया। जिसके कारण हजारों लोग आज बेरोजगारी का आलम झेलने के लिए मजबूर है।
प्रधान मंत्री के आत्मनिर्भर योजना के तहत पालिका प्रशासन ने कोरोना काल के बाद छोटे व्यवसायियों व ठेला गाडी मालिकों को 10 हजार, 20 हजार और 50 हजार तक कर्ज दिया था। पालिका के राष्ट्रीय नागरिक उपजीविका अभियान के व्यवस्थापक कैलाश पाटिल ने बताया कि मनपा प्रशासन, दीन दयाल उपाध्याय राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन विभाग व सीएमसी केन्द्रों के माध्यम से शहर के 20 हजार 578 फेरीवालों ने आत्मनिर्भर योजना के तहत कर्ज के लिए आवेदन किया था। इसमें से बैंक ने 6 हजार 791 के लोगों का आवेदन को वापस कर दिया था जबकि 2 हजार 961 फेरीवालों के आवेदन को बैंक ने त्रुटियां बताकर निरस्त कर दिया था। इतना ही नहीं 3 हजार 830 लोगों का आवेदन को बैंक ने बिना कारण बताऐ निरस्त कर दिया है। शहर में सिर्फ 6 हजार 597 फेरी वालों को आत्मनिर्भर योजना द्वारा कर्ज मिला है। इसमें से 5 हजार 924 फेरीवालों को 10 हजार रूपये, 629 फेरीवालों को 20 हजार रूपये तथा 44 फेरीवालों को 50 हजार कर्ज वितरित किये गये है। परन्तु पालिका प्रशासन द्वारा लगातार हो रही कार्रवाई से आत्मनिर्भर योजना के लाभार्थी कर्ज की ईएमआई भरने में असमर्थ है। जिसके कारण एक तरफ बेरोजगारी दूसरे तरह पालिका की कार्रवाई से मानसिक रूप से बीमार हो रहे है।
फेरी का धंधा करने वाले वाले कपिल गुप्ता, सालिक राम गुप्ता और संजय ने बताया कि पिछले दो महीने से पालिका का अतिक्रमण दस्ता सड़क पर हाथ गाडियों को चकनाचूर कर रही है। वही पर समान व फल तथा सब्जियां सड़क पर फेक कर नुकसान कर रहे है। शहर में फेरीजोन नहीं है। वर्ष 2012 में फेरी जोन बनाने और फेरीवालो को आई कार्ड बनाने के लिए फार्म भराया गया था। लेकिन 11 साल बीत जाने के बाद भी फेरीवाला जोन नहीं बना। फेरीवालों दररोज पालिका प्रशासन को 30 रूपये शुल्क भी देती है। इसके बावजूद पालिका प्रशासन द्वारा कार्रवाई करना अन्याय कारक हैं।इस प्रकार आरोप भिवंडी ठेला चालक -मालक के संगठना के अध्यक्ष अदनान मोमीन ने लगाया है।
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