
पालिका की दिखावटी कार्रवाई या अवैध निर्माण पर वाकई सख्ती ?
- महेंद्र कुमार (गुडडू), ब्यूरो चीफ भिवंडी
- Mar 02, 2025
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भिवंडी। शहर में अवैध निर्माणों का सिलसिला लगातार जारी है, लेकिन महानगर पालिका की कार्रवाई हमेशा सवालों के घेरे में रही है। हाल ही में भिवंडी-निजामपुर महानगर पालिका के सहायक आयुक्त माणिक जाधव ने नागांव इलाके में दो अवैध इमारतों पर कार्रवाई करते हुए उनके मालिकों के खिलाफ शांतिनगर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज करवाया।
बिल्डरों पर केस, लेकिन प्रशासन की मंशा पर सवाल ! ::::
मामला यह है कि जिन दो इमारतों पर कार्रवाई की गई, वे लगभग पूरी तरह तैयार हो चुकी थीं। सवाल यह उठता है कि जब यह इमारतें बन रही थीं, तब पालिका प्रशासन कहां था ? क्या अधिकारियों को इन निर्माणों की भनक नहीं लगी या फिर आखिरी समय तक किसी ‘डील’ का इंतजार किया जा रहा था ?
सूत्रों के अनुसार, अमजादिया रोड स्थित मकान क्रमांक 364/0 के मालिक नूर मोहम्मद दीन मोहम्मद और मकान 359/1 के मालिक विठोबा महादेव दुर्गुले ने बिना किसी अनुमति के पुराने मकान तोड़कर आरसीसी इमारतों का निर्माण किया। यह इमारतें मुख्य सड़क के किनारे स्थित हैं, जिससे यह साफ है कि निर्माण कार्य खुलेआम हुआ होगा। इसके बावजूद पालिका अधिकारियों ने तब कोई कदम नहीं उठाया और अब ‘फॉर्मेलिटी’ पूरी करने के लिए मामला दर्ज करवा दिया।
आईएएस अधिकारी की नियुक्ति के बाद अचानक कार्रवाई क्यों ? ::::
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि पालिका ने अभी ही कार्रवाई क्यों की ? हाल ही में आईएएस अधिकारी को महानगर पालिका का नया आयुक्त नियुक्त किया गया है। क्या यह कार्रवाई सिर्फ दिखाने के लिए की गई, ताकि यह साबित किया जा सके कि नए आयुक्त आने के बाद प्रशासन सख्त हो गया है ?
यदि पालिका वास्तव में अवैध निर्माणों को रोकना चाहती थी, तो निर्माण शुरू होते ही कार्रवाई क्यों नहीं की गई ? क्या इस दौरान किसी अधिकारी की मिलीभगत थी? क्या बिल्डरों ने पहले प्रशासन से ‘सैटिंग’ करने की कोशिश की और जब बात नहीं बनी तो अब उन पर केस दर्ज कर दिया गया?
पालिका की निष्क्रियता बनी सवालों का केंद्र :::
यह कोई पहला मामला नहीं है जब महानगर पालिका की निष्क्रियता पर सवाल उठे हों। इससे पहले भी कई अवैध निर्माण तब तक चलते रहे, जब तक वे पूरे नहीं हो गए। बाद में कार्रवाई का नाटक कर पुलिस में शिकायत दर्ज कर दी जाती है, लेकिन न तो इमारतें गिरती हैं और न ही कोई बड़ा अधिकारी जांच के दायरे में आता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या प्रशासन इस मामले में वाकई कड़ी कार्रवाई करेगा या फिर यह भी सिर्फ ‘मीडिया स्टंट’ बनकर रह जाएगा ?
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