भिवंडीकरों ने उठाया ब्याज माफी का लाभ। एक महीने में वसूले गए 24.62 करोड़ रुपये

भिवंडी। भिवंडी महानगरपालिका क्षेत्र में संपत्ति कर वसूली को लेकर हमेशा शिकायतें आती रही हैं। इस समस्या के समाधान के लिए पूर्व और वर्तमान आयुक्त अनमोल सागर ने सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए थे। 1 जनवरी को कर विभाग के उपायुक्त पद पर बालकृष्ण क्षीरसागर की नियुक्ति के बाद, आयुक्त के मार्गदर्शन में बीते दो महीनों में 31 करोड़ रुपये का संपत्ति कर वसूल किया गया। इस वित्तीय वर्ष में अब तक कुल 70.62 करोड़ रुपये की वसूली की जा चुकी है। इसमें से अकेले फरवरी महीने में 24.65 करोड़ रुपये की वसूली अभय योजना के तहत हुई, यह जानकारी उपायुक्त बालकृष्ण क्षीरसागर ने दी।

भिवंडी महानगरपालिका क्षेत्र में कुल 634 करोड़ रुपये की संपत्ति कर बकाया राशि है, जिसमें 477 करोड़ रुपये पिछला बकाया और 157 करोड़ रुपये चालू वित्त वर्ष का कर शामिल है। 477 करोड़ रुपये के बकाया पर 168 करोड़ रुपये का ब्याज लग चुका है, जिससे कुल कर वसूली की मांग 802 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। गौरतलब है कि 477 करोड़ रुपये के बकाए में लगभग 133 करोड़ रुपये की संपत्तियां विवादित या दोहरी प्रविष्टियों के कारण अटकी हुई हैं, जिससे यह आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है।

महानगरपालिका प्रशासन ने बकाया संपत्ति कर की वसूली के लिए कई बार ब्याज माफी की "अभय योजना" लागू की है। इस वर्ष यह योजना तीन बार लागू की गई। फरवरी के पहले चरण में (1 से 14 फरवरी) 100% ब्याज माफी दी गई, जिससे 19.84 करोड़ रुपये की वसूली हुई और करदाताओं को 4.98 करोड़ रुपये की ब्याज माफी का लाभ मिला। दूसरे चरण (15 से 28 फरवरी) में 75% ब्याज माफी दी गई, जिससे 4.78 करोड़ रुपये की वसूली हुई और 61.94 लाख रुपये की ब्याज माफी दी गई।

फरवरी महीने में कुल 24.62 करोड़ रुपये का संपत्ति कर वसूला गया और इस दौरान करदाताओं को 5.60 करोड़ रुपये की ब्याज माफी मिली। भिवंडी महानगरपालिका क्षेत्र में 2.35 लाख आवासीय, 38,000 व्यावसायिक और 2,500 मिश्रित संपत्तियां हैं। इनमें आवासीय संपत्तियों पर 462 करोड़ रुपये, व्यावसायिक संपत्तियों पर 137 करोड़ रुपये और मिश्रित संपत्तियों पर 33.85 करोड़ रुपये का कर बकाया है।अभय योजना का अंतिम चरण 31 मार्च तक जारी रहेगा, जिसमें 50% ब्याज माफी का प्रावधान किया गया है। कर विभाग के उपायुक्त बालकृष्ण क्षीरसागर ने नागरिकों से अपील की है कि वे इस योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और अपने बकाया कर का भुगतान करें ताकि संपत्तियों की जब्ती और नीलामी जैसी सख्त कार्रवाई से बचा जा सके।

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