पुरानी इमारतों पर कार्रवाई, नई अवैध इमारतों को संरक्षण

प्रभाग समिति क्र. 3 के अधिकारियों पर गंभीर आरोप

80 हजार में डील, बीट निरीक्षक को भी मिली ‘अग्रिम राशि’

भिवंडी‌। भिवंडी महानगरपालिका क्षेत्र में अवैध निर्माण को लेकर एक बार फिर प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार की बू आने लगी है। प्रभाग समिति क्रमांक 3 अंतर्गत क्षेत्र में जहां एक ओर जर्जर और वर्षों पुराने भवनों पर तोड़ू कार्रवाई की जा रही है, वहीं दूसरी ओर नई-नई बन रही अवैध इमारतों को अघोषित संरक्षण प्राप्त होने का आरोप स्थानीय नागरिकों ने लगाया है।

कामतघर, फेना पाड़ा, पद्मानगर, अंजूरफाटा, सोसाइटी चाल, नारपोली, कमला होटल के पीछे और शास्त्री नगर सहित अनेक इलाकों में दर्जनों अवैध इमारतों का निर्माण दिनदहाड़े खुलेआम जारी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि मनपा का संबंधित विभाग इन निर्माणों को देखकर भी आंखें मूंदे हुए है।

नारपोली पुलिस स्टेशन में दर्ज शिकायतों के अनुसार, भगवान सोमचंद शाह और रश्मी राजेन्द्र आंबवणे नामक दो साइज़िग कंपनी मालिको ने बिना किसी अनुमति के दो मंजिला लोहे के खबें व सीमेंट पतरा शेड का निर्माण किया। प्रभाग समिति तीन के सहायक आयुक्त सुरेन्द्र भोईर ने दोनों के खिलाफ नारपोली पुलिस स्टेशन में  महाराष्ट्र प्रादेशिक नगररचना अधिनियम 1966 की धारा 52 के तहत मामला दर्ज कराया है।लेकिन यह केवल कागज़ी कार्रवाई बनकर रह गई।

एक पूर्व ठेकेदार ने खुलासा किया कि मानसून से पहले जर्जर इमारतों को तोड़ने का ठेका दिलवाने के नाम पर अधिकारियों को मोटी रकम देने की 'डील' तय हो चुकी है। सहायक आयुक्त सुरेन्द्र भोईर को 80 हजार और वीट निरीक्षक सूरज गायकवाड़ को 10 हजार रुपये अग्रिम भुगतान किया गया है। यह खुलासा एक बड़े भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन केवल पुराने निर्माणों पर कार्रवाई कर दिखावा कर रहा है, जबकि नई और खतरनाक इमारतों को जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है। नागरिकों ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।इस पूरे मामले पर मनपा प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन एफआईआर दर्ज होने और अवैध निर्माण के पुख्ता प्रमाणों के बावजूद कार्रवाई न होना प्रशासन की भूमिका पर सवालिया निशान लगा रहा है।

रिपोर्टर

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