भिवंडी मनपा का नया मंत्र - दे घूस और ले परमीशन

क्लर्कों की जेब में इंजिनियरिंग की डिग्री,अफसरों की आंखों में पट्टी

भिवंडी। भिवंडी मनपा एक बार फिर भ्रष्टाचार के दलदल में धंसती नजर आ रही है। यहां क्लर्क स्तर के कर्मचारी खुद को इंजीनियर बताकर पुरानी इमारतों की मरम्मत की परमीशन देने का गोरखधंधा चला रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, मरम्मत की अनुमति के एवज में इमारत मालिकों से तीन से पांच लाख रुपये तक की मोटी वसूली की जा रही है। इस गोरखधंधे में नीचे से ऊपर तक की मिलीभगत की बू साफ महसूस की जा सकती है। वसूली का सीधा हिस्सा प्रभारी सहायक आयुक्तों की जेब में जा रहा है, जबकि प्रशासन चुप्पी साधे बैठा है। 

प्रभाग समिति क्रमांक तीन के नारपोली कामतघर इलाके में बनी 40 से 45 साल पुरानी तल अधिक एक मंजिला इमारत को मरम्मत के नाम परमीशन देकर तल अधिक पांच मंजिला इमारत निर्माण कर दी गई।‌

हलाकि इस अवैध निर्माण की जानकारी प्रभाग कार्यालय से लेकर तत्कालीन आयुक्त एवं प्रशासक अजय वैद्य को भी थी। किन्तु कार्रवाई नहीं की गई‌ जिसे लेकर स्थानीय लोगों ने शिकायतें दर्ज करवाई है।  इसी प्रभाग के कणेरी पद्मानगर क्षेत्र  के घर नंबर 1209/1,1209/2 और 1209/ 3 के मालिक महेन्द्र मनसुखलाल उनाडकर ने पहले मरम्मत का परमीशन लिया बाद मय उसी परमीशन के नाम पर पुरानी इमारत को तोड़ कर पवार लूम कारखाने का शेड तैयार कर लिया।

यह सिर्फ एक प्रभाग समिति क्रमांक तीन का केवल मामला नहीं हैं। अन्य प्रभागों को इस बड़े खेल की डील खेली जाती है।   प्रश्न उठता है कि भिवंडी मनपा के प्रशासक अनमोल सागर, अतिरिक्त आयुक्त देवीदास पवार और अतिक्रमण उपायुक्त इन अनियमितताओं पर चुप क्यों हैं ? क्या इनकी चुप्पी इस गड़बड़ी की मूक स्वीकृति है।

शहर विकास विभाग का हाल भी बेहाल है,अतिक्रमण हटाना तो दूर, ठेले और हाथगाड़ियों को हटाने में भी ये विभाग असफल साबित हो रहा है।तीनबत्ती मार्केट, शांतिनगर, खंडूपाडा जैसी जगहों पर अतिक्रमण पहले जैसा कायम है। तीनबत्ती की चप्पल लाइन पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जबकि यह इलाका वर्षों से अवैध कब्जे का गढ़ बना हुआ है। नझराना, सुभाष गार्डन, और खाऊ गली जैसे इलाकों में कई बार अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाया गया, लेकिन बाजार फिर से सज जाते हैं। सवाल उठता है क्या यहां भी कोई 'डील' तय है ?

रिपोर्टर

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