अनुमंडल के विभिन्न प्रखंडों में छठ व्रतियों ने डूबते सूर्य को अर्पित किया अर्घ्य
- कुमार चन्द्र भुषण तिवारी, उप संपादक बिहार
- Oct 27, 2025
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संवाददाता सिगासन सिंह यादव की रिपोर्ट
भभुआंं(कैमूर)-- अनुमंडल क्षेत्र में इस बार छठ महापर्व की धूम देखने लायक रही। जिले के चांद, चैनपुर, भगवानपुर और अधौरा प्रखंडों में श्रद्धा, भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। महिलाओं ने पूरे विधि-विधान के साथ छठ व्रत रखा और आज शाम डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया। घाटों पर ‘छठ मइया’ के गीतों की मधुर गूंज से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
भभुआं शहर से लेकर सुदूर गांवों तक महिलाएं पारंपरिक वस्त्रों में सुसज्जित होकर घाटों पर पहुंचीं। नदी, तालाब और पोखरों के किनारे व्रतियों ने डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर अपने परिवार की सुख-समृद्धि और समाज की भलाई की कामना की। महिलाओं के साथ-साथ पुरुषों और बच्चों में भी उत्साह देखने को मिला। सभी ने मिलकर घाटों की सफाई, सजावट और दीपों से रोशनी की व्यवस्था की।
कैमूर प्रशासन की ओर से इस बार विशेष सुरक्षा इंतज़ाम किए गए थे। भभुआ अनुमंडल अधिकारी, पुलिस बल और आपदा प्रबंधन टीमों ने विभिन्न घाटों पर सुरक्षा की दृष्टि से तैनाती की। गोताखोरों की टीम को भी तैयार रखा गया ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। प्रशासन की चौकसी और स्थानीय लोगों के सहयोग से पर्व शांतिपूर्ण और सुरक्षित माहौल में सम्पन्न हुआ।
अधौरा प्रखंड जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में भी श्रद्धालुओं ने पूरी आस्था के साथ छठ का आयोजन किया। सूर्योदय और सूर्यास्त के सुंदर दृश्यों के बीच लोगों ने छठी मईया से अपनी मनोकामनाएँ मांगीं। इस दौरान स्थानीय युवाओं और सामाजिक संस्थाओं ने भी घाटों पर व्रतियों की सहायता में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
चारों प्रखंडों में इस बार छठ व्रतियों की संख्या में पिछले वर्षों की तुलना में वृद्धि देखी गई। कोरोना काल के बाद यह पहला ऐसा मौका रहा जब बिना किसी पाबंदी के लोगों ने खुलकर आस्था का प्रदर्शन किया।
कल सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देकर छठ पर्व का समापन किया जाएगा। चार दिनों तक चलने वाले इस महापर्व ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि छठ केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि लोक आस्था, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक एकता का प्रतीक है


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