मंगलमूर्ति डाइंग कंपनी में भीषण आग सुरक्षा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल

भिवंडी। भिवंडी तालुका के सरावली एमआईडीसी क्षेत्र में शुक्रवार सुबह एक डाइंग कंपनी में भीषण आग लग गई। आग इतनी तेज थी कि पूरी तीन मंजिला इमारत इसकी चपेट में आ गई। आसपास का इलाका काले धुएं से भर गया और कई किलोमीटर दूर तक आग की लपटें साफ दिखाई दीं। घटना की सूचना मिलते ही भिवंडी, कल्याण, डोंबिवली और ठाणे से दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने का प्रयास शुरू किया गया। देर रात तक फायर ब्रिगेड की टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटी रहीं।

गौरतलब हो कि यह आग मंगल मूर्ति डाइंग कंपनी में लगी बताई जा रही है। कंपनी में कपड़ों की रंगाई का काम होता था। स्थानीय लोगों के अनुसार सुबह तक सब कुछ सामान्य था, लेकिन दोपहर होते-होते कंपनी के भीतर से धुआं उठता दिखाई दिया और कुछ ही मिनटों में आग ने विकराल रूप ले लिया। प्रशासन ने आसपास की फैक्ट्रियों और दफ्तरों को तुरंत खाली करा लिया। फिलहाल किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन आग की तीव्रता को देखते हुए भारी नुकसान की आशंका जताई जा रही है।

भिवंडी और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह की लगभग ढाई सौ साइजिंग और डांइग - रंगाई कंपनियां संचालित हैं। इन उद्योगों में से अधिकांश में न तो पर्याप्त अग्निशमन व्यवस्था है और न ही सुरक्षा मानकों का पालन किया जाता है। इसी लापरवाही के कारण इस औद्योगिक क्षेत्र में ऐसे हादसे आए दिन घटित होते रहते हैं। उद्योग विभाग और महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम के अधिकारियों पर भी लापरवाही के आरोप लग रहे हैं, क्योंकि बार-बार आग की घटनाओं के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की जाती। स्थानीय नागरिकों ने बताया कि इन कंपनियों में काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा के लिए न कोई अलार्म सिस्टम लगाया गया है और न ही आग से बचाव के लिए जरूरी उपकरण उपलब्ध हैं। इससे श्रमिकों की जान हर समय खतरे में रहती है। उद्योग क्षेत्र में कार्यरत मजदूर संघटनाओं ने इस हादसे के बाद सरकार से मांग की है कि सभी डाइंग कंपनियों की तुरंत जांच की जाए और जिन इकाइयों में फायर सेफ्टी के इंतजाम नहीं हैं, उनके संचालन पर रोक लगाई जाए। भिवंडी औद्योगिक क्षेत्र राज्य की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता है, लेकिन यहां की अव्यवस्थित औद्योगिक नीति और प्रशासनिक उदासीनता के कारण बार-बार हादसे हो रहे हैं। इस आग ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि बिना ठोस सुरक्षा नीति के विकास का दावा अधूरा है। अब देखना यह है कि शासन इस बार इस गंभीर लापरवाही पर क्या कदम उठाता है, क्योंकि यह केवल एक फैक्ट्री की आग नहीं, बल्कि पूरे औद्योगिक तंत्र की खामियों का आईना है।

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