देश को गर्त में ले जाने वाले लोगों से सावधान होने की है जरूरत

वरिष्ठ संवाददाता श्याम सुन्दर पांडेय की लेखनी से 

दुर्गावती(कैमूर)--  डरा हुआ अखबार बिका हुआ पत्रकार, जात वादी नेता, जाति आधारित कानून किसी संगठन का बैनर लगाकर समाज को ठगने, धर्म का खाल ओढ़कर रोजगार करने वाले लोग, यह सब देश को गर्त में ले जाने वाले लोग हैं, ऐसे लोगों की पहचान जनता को करनी चाहिए और उनका बहिष्कार भी। आज के समय में ऐसे लोगों की पहचान नहीं हो पाती ऐसे लोग केवल खाल ओढ कर अपने-अपने विभागों के माध्यम से केवल देश की जनता को भ्रमित ही नहीं कर रहे ,बल्कि देश को कमजोर भी कर रहे है धर्म सही रास्ते पर चलने का संदेश देता है तो संगठन समाज का कल्याण काम करता है। अखबार सही खबर छापने का काम करता है और चापलूसों से दूर रहता है वही अखबार सच्चा अखबार है किसी के भय से सच्चे पत्रकारों पर कार्रवाई करना निकाल देना ऐसा नहीं करता यदि करता है तो यह देश के लिए नहीं समाज के लिए भी एक धोखा है। जो डर गया अखबार का मालिक और जो बिक गया पत्रकार दोनों ही देश के लिए घातक है इससे समाज में दूरियां और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है। ऐसे लोगों के प्रति न देश में कोई कार्रवाई हो रही है न कोई कानून बन रहा है जिसके चलते बैनर की आड़ में कहा जाए तो एक कला व्यापार चल रहा है माना जा सकता है। जातिवादी नेता देश में रह रहे अनेक जातियां को एक साथ नहीं लाते हैं न उस पर अमल करते है जिसके चलते समाज में सामाजिक दूरियां बढ़ती है ताने-बाने छिन्न भिन्न होते हैं और नफरत का जन्म होता है ऐसे राजनेता भी देश को गर्त में ले जाने वाले ही कहे जाने चाहिए। सब अपने अपने फायदे के लिए व्यापार चल रहा है ऐसे में आम जनता और विशेष कर पढ़े लिखे बुद्धिजीवी वर्ग और युवा वर्ग को सावधान रहना चाहिए और आने वाले दिनों में सतर्कतापूर्ण निर्णय लेना चाहिए। आज देश में सामाजिक दूरियों के बढ़ने का क्रम जारी है जिसका परिणाम है जाति आधारित सुविधा, जाति आधारित कानून व जाति आधारित मार्गदर्शन। संविधान के दायरे में रहकर समाज को कमजोर करने का, देश को बांटने का, देश के अंदर अशांति फैलाने का इससे बड़ा उदाहरण क्या हो सकता है। सबका साथ और सब का विकास कैसे होगा जब देश में एक कानून संविधान में सबके लिए समान अधिकार की बात के साथ बेईमानी होगी। राष्ट्र एक जाति अनेक उसके लिए भेदभाव युक्त कानून से बाहर आना होगा और ठगने वाले संगठन और धर्म की आड़ में या पत्रकारिता की आड़ में व्यापार करने वाले लोगो से सावधान रहना होगा। राजनेताओं का जनता ने बहुत देखा अब सावधानी पूर्वक निर्णय लेने का समय आ गया है जैसे हाथ एक उंगलियां अनेक सब मिलकर एक शक्ति बनती है उसी तरह देश में काम होने चाहिए। ढोंगी संगठन हो या अखबार हो या धार्मिक लोगों या सामाजिक सेवा का संगठन हो सब पर जनता की पैनी नजर होनी चाहिए। देश आम नागरिक का और सोच भी आम नागरिक की होनी चाहिए जिस देश को गर्त में जाने से बचाया जा सके।

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