रोहतास उद्योग डालमियानगर रामकृष्ण डालमिया
- सुनील कुमार, जिला ब्यूरो चीफ रोहतास
- Jan 09, 2026
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संवाददाता पारसनाथ दुबे न
कभी एशिया का सबसे बड़ा रोहतास उद्योग डालमियानगर रामकृष्ण डालमिया ने 1933 में स्थापित किया था 8 जुलाई 1984 बंद होने के बाद 219 एकड़ में कैंपस में फैला रोहतास उद्योग अब बीरान हो गया है इसमें करीब अस्थाई एवं अस्थाई 20000 मजदूर काम करते थे डालमियानगर में रोहतास इंडस्ट्रीज लिमिटेड की कई मशीन स्थापित करने में उनके छोटे भाई जग दयाल और दामाद साहू शांति प्रसाद जैन में उनकी सहायता की चीनी कारखाने की आधारशिला 1933 में रखी गई थी इसकी मशीनें स्कॉटलैंड ग्लासको से मंगाया गया था चीनी कारखाने की आधारशिला रखी गई थी इसके बाद सीमेंट कारखानेकी आधारशिला 1937 में रखी गई डालमियानगर के एक बहुत बड़े औद्योगिक साम्राज्य के उदय और पतन की कहानी शुरू हो गया कभी चीनी सीमेंट डालना कागज रसायन जिसे कई उत्पाद बनाती थी लेकिन इसके पतन की शुरुआत 1984 में हो गया और करीब 20000 मजदूरों के आश्रितों के बाल बच्चों पर आर्थिक कमजोरी के चलते उनका भविष्य अंधकार में हो गया तत्कालीन रेल मंत्री लालू यादव ने इस उद्योग की संपत्ति को 0209 मैं करीब एक अरब 40 करोड़ मैं क्रय कर लिया और यह कारखाना का मशीनरी सामान कबाड़ के भाव में बिक गया इस समय से यह नगरी गुमनाम नगरी में डूब गया और यह कारखाना लिक्विडेशन में चला गया और इसकी पूरी संपत्ति हाईकोर्ट के अधीन हो गया है आज भी यहां के लोग अपने भाग्य को कोसते हैं किसी का घर नहीं है किसी को रहने की व्यवस्था नहीं है अपने बाल बच्चों को लेकर डालमियानगर कंपनी का क्वार्टर मै रहते हैं लेकिन हमेशा चिंता एवं भय में रहते हैं कहीं ऐसा ना हो कि यह भी आशियाना कोर्ट द्वारा छीन लिया जाए जबकि मजदूरों का पटना हाई कोर्ट में केस बिचारा दिन है


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