खुली आँखें, बंद विवेक, राजनीति की भेंट चढ़ता सनातन और सामर्थ्य
- कुमार चन्द्र भुषण तिवारी, उप संपादक बिहार
- Jan 10, 2026
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योग्यता की बलि और प्रतिभा पलायन के बीच सुलगते कुछ अनसुलझे सवाल
वरिष्ठ संवाददाता श्याम सुंदर पांडेय की रिपोर्ट
दुर्गावती (कैमूर)- सनातन धर्म का उपहास करने वाले और सनातन को गाली देने वाले वर्तमान में आंखें खुली होने के बाद भी अंधे हैं। जिस सनातन धर्म के वेद शास्त्रों के सूत्र से दुनिया में आज भी विज्ञान और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में नई-नई खोज कर बेताज बादशाह बनी है, जिसे समझ नहीं पा रहे हैं आज के लोभी और लंपट राजनेता। उनको केवल दिखाई देता है घोटाला और वोट के लिए कुर्सी वे अपनी बंद आंखे खोल कर देखें।क्या इस देश के राजनेता और समाज सेवी और विपक्षी दल को दिखाई नहीं देता की अमेरिका आज हमे धमका रहा है, वह भी इसी सनातन के सूत्र से और यही के होनहार सूत्र की व्याख्या करने वालों ने अमेरिका को बेताज बादशाह बना दिया। साथ ही यही अमेरिका हमारे ही देश के बच्चों से ज्ञान लेकर भारत समेत पूरी दुनिया को भी धमका रहा है और विश्व का बेताज बादशाह बन बैठा है। लेकिन इस देश में सनातन को गाली देने वाले बांटने वाले लोगों के आंखों पर पट्टी बधी है क्योंकि भारत के राजनेता योग्यता को आरक्षण लगा कर बलि की वेदी पर चढ़ा दिए हैं और चढ़ा रहे है जिसके कारण अपनी भूख मिटाने के लिए सरकार के दोहरी नीतियों के कारण इस देश के बच्चों को विदेश की तरफ जाना पड़ रहा है आज भी जा रहे हैं और विदेशी कंपनियों में काम कर रहे है यदि यही रवैया जारी रहा तो आगे भी जायेंगे। इसके लिए कौन जिम्मेवार है यह एक विचारणीय विषय है और देश के अंदर बहस करने का एक अहम मुद्दा है। इसलिए कम से कम सरकार और अन्य राजनेताओं को योग्यता की बलि चढ़ाना बंद करनी चाहिए। यह सब अपनी आंखों से देखने के बाद भी राजनेताओं की नीद नहीं टूट रही है तो इस देश का दुर्भाग्य है। देश के भाग्य और दुर्भाग्य का निर्माण करता तो शासन ही करता होता है। इसलिए ईमानदार और धर्म संरक्षित शासक चाहे तो देश को ऊंचाइयों के शिकार पर ले जा सकता है या समुद्र की गहराईयो में डूबो सकता है।
"जब तक योग्यता राजनीति की गुलाम रहेगी, तब तक राष्ट्र का ज्ञान दूसरों के घर की शोभा बढ़ाएगा।"
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