डॉग सेंटर में भ्रष्टाचार, लापरवाही और पशु क्रूरता के आरोप, कार्रवाई की मांग तेज

भिवंडी। भिवंडी- निजामपुर शहर महानगर पालिका के स्वच्छता व आरोग्य विभाग द्वारा संचालित डॉग सेंटर (श्वान नसबंदी केंद्र) एक बार फिर विवादों में घिर गया है। केंद्र में कथित भ्रष्टाचार, गंभीर लापरवाही और पशु क्रूरता के आरोपों को लेकर शिवसेना (उबाठा) के जिला प्रमुख मनोज गगे और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। आयुक्त को सौंपे गए ज्ञापन में श्वान केंद्र की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं और तत्काल जांच कर कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है।

ज्ञापन के अनुसार, महानगर पालिका द्वारा आवारा कुत्तों की नसबंदी और नियंत्रण के लिए बनाए गए स्लॉटर हाउस में संचालित डॉग सेंटर में मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। आरोप है कि यहां पकड़े गए कुत्तों की उचित देखभाल नहीं की जाती, उन्हें पर्याप्त भोजन और पानी नहीं दिया जाता तथा ऑपरेशन के बाद जरूरी मेडिकल निगरानी का अभाव रहता है। इससे कई कुत्तों की हालत बिगड़ने और मौत होने की आशंका जताई गई है। सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप बोडके, आयान मोमिन आदि लोगों का कहना है कि नसबंदी प्रक्रिया भी तय दिशा-निर्देशों के अनुसार नहीं हो रही है। ऑपरेशन के बाद रिकवरी और देखभाल के लिए आवश्यक ‘एलएसएस’ (LSS) सुविधा उपलब्ध नहीं होने से पशुओं के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा बना रहता है। इसके अलावा नियमों के विरुद्ध कुत्तों को उनके मूल इलाके में छोड़ने के बजाय कहीं भी असुरक्षित स्थानों पर छोड़ने के आरोप लगाए गए हैं, जिससे आम नागरिकों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ रही है।

ज्ञापन में एक दर्दनाक घटना का भी उल्लेख किया गया है। आरोप है कि मानसिक रूप से अस्वस्थ कुत्तों की उचित देखभाल नहीं होने के कारण 31 जनवरी 2026 को एक 13 वर्षीय बालक की कुत्ते के काटने से मौत हो गई। इस घटना ने डॉग सेंटर की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसके अलावा एक महिला ने शिकायत की है कि 10 जनवरी 2026 को कामतघर क्षेत्र से उसके पालतू कुत्ते को केंद्र के कर्मचारियों द्वारा उठा लिया गया। पुष्टि होने के बावजूद महिला को उसका कुत्ता वापस नहीं मिला। 3 फरवरी 2026 को जब पीड़िता और प्रतिनिधि केंद्र पहुंचे तो वहां कुत्ता नहीं मिला, जिससे लापरवाही और अनियमितता के आरोप और गहरे हो गए है।नागरिकों ने मांग की है कि जनहित और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए डॉग सेंटर को तत्काल प्रभाव से बंद किया जाए तथा संबंधित ठेकेदार और दोषी नगर निगम कर्मचारियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही मृत बालक के परिवार को उचित मुआवजा देने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की भी मांग की गई है।

आंकडे देखे तो पिछले 6 वर्षो में भिवंडी में 67,183 लोग श्वान बाइट का शिकार हुए,  सिर्फ जनवरी 2026 में 1062 लोगों को कुर्तों ने काटा। वहीं, पिछले एक वर्ष में 11,037 लोग स्वान हमले में घायल हुए। शहर में अनुमानित 14 हजार से अधिक आवारा स्वान सड़कों और गलियों में झुंड बनाकर घूम रहे हैं, जिससे राहगीरों, स्कूली बच्चों और दोपहिया वाहन चालकों की जान हमेशा खतरे में रहती है। कई मामलों में डर के कारण वाहन चालक दुर्घटनाग्रस्त भी हो चुके हैं।

मनपा द्वारा आवारा स्वानों की नसबंदी और रेबीज टीकाकरण का ठेका हैदराबाद की “वेट्स सोसाइटी फॉर एनिमल वेलफेयर एंड रूरल डेवलपमेंट” को पांच वर्षों के लिए दिया गया है। लक्ष्य 13,500 स्ट्रीट डॉग्स की नसबंदी का था, लेकिन जनवरी 2026 तक 15 माह में सिर्फ 6134 स्वानों की ही नसबंदी हो सकी है। यानी रोजाना औसतन मात्र 13 स्वानों की नसबंदी। यही नहीं, टीकाकरण की रफ्तार भी बेहद धीमी है, जिससे स्वानों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। ईदगाह, शांतिनगर, कामतघर, नागांव, गायत्रीनगर, निजामपुर और कोंबडपाड़ा जैसे इलाकों में हालात सबसे ज्यादा खराब हैं। नागरिकों का आरोप है कि स्वान पकड़ने वाले ठेकेदार के कर्मचारी कभी-कभार ही नजर आते हैं। नसबंदी के बाद पहचान के लिए कान पर लगाया जाने वाला निशान भी इतना छोटा होता है कि यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि कौन सा स्वान नसबंद है और कौन नहीं ।

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