पशु चारे के निर्यात पर 30 जून तक प्रतिबंध

राजगढ़ । उप संचालक पशु चिकित्सा सेवायें द्वारा बताया गया कि वर्तमान में रबी फसल की कटाई का कार्य प्रारंभ हो चुका है। जिसके उपरांत चारे भूसे की उपलब्धता पशुधन के लिये बनाये रखना आवश्यक है। म.प्र. राज्य के जिलों को छोड़कर अन्य राज्यों के जिलों में भूसे के परिवहन तथा ईंट भ‌ट्टों के ईंधन के रूप में चारे भूसे का उपयोग पूर्णतः प्रतिबंधित किया जाना आवश्यक है। इस हेतु भूसे के परिवहन तथा ईट भ‌ट्टों के ईंधन के रूप में चारे भूसे का उपयोग पूर्ण प्रतिबंधित किये जाने का अनुरोध किया है।

कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा द्वारा उप संचालक पशु चिकित्सा सेवायें के प्रतिवेदन एवं अन्य स्त्रोंतो की जानकारी के आधार पर ग्रीष्मकाल में जिले में पशुधन के लिये चारे की उपलब्धता आवश्यक है। यदि राजगढ़ जिले की सीमा के बाहर जिले से पशु चारा निर्यात प्रतिबंधित नहीं किया जाता है तो जिले में पशुधन के लिये चारा की कमी होगी, तथा चारा के बाजार मूल्य में अधिक वृद्धि होना संभावित है। ऐसी स्थिति में पशुओं का चारे के बिना भूखे रहने की स्थिति निर्मित हो सकती है।

कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा द्वारा मध्यप्रदेश पशु चारा (निर्यात नियंत्रण) आदेश 2000 के निहित प्रावधानों का प्रयोग करते हुए पशुओं के आहार के रूप में उपयोग में लाने वाले समस्त प्रकार के चारे, घास, भूसा एवं पशुओं के द्वारा खाये जाने वाले अन्य किस्म के चारे पर राजगढ़ जिले की राजस्व सीमा के बाहर निर्यात पर 30 जून, 2026 तक के लिये प्रतिबंध लगाया गया है।

साथ ही कोई भी कृषक, व्यापारी, व्यक्त्ति निर्यातक उपरोक्त क्रम में से किसी भी प्रकार के पशु चारे का किसी भी वाहन, मोटर, रेल, यान, नाव अथवा पैदल जिले के बाहर मेरे बिना अनुज्ञा पत्र के निर्यात नहीं करेगा। शासकीय उपयोग के लिये भूसा एवं पशु चारे का परिवहन संबंधित अनुविभागीय (राजस्व) अधिकारी की अनुमति से किया जाएगा। उक्त आदेश का उल्लंघन होने पर मध्यप्रदेश पशु चारा (निर्यात नियंत्रण) आदेश 2000 के निहित प्रावधानों के तहत् दण्डात्मक कार्यवाही की जाएगी।

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