भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी, तस्करी व अवैध वसूली पर रोक लगाने में विफल, बिहार पुलिस महानिदेशक का तुगलकी फरमान शिखा तिलक व कलावा पर रोक
- कुमार चन्द्र भुषण तिवारी, उप संपादक बिहार
- Apr 28, 2026
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आदि काल से ही सुनने को मिलते आ रहा है कि , सनातन धर्म में पले बढ़े ही पद पर आसक्त होने के बाद अभिमान वश पथ भ्रष्ट हो सनातन धर्म की जड़ों को नेस्तनाबूद करने की चाह पाल अग्रसर होते आए, अंततः खुद ही नेस्तनाबूद हो गए।
सनातन धर्म में तिलक लगाने की परंपरा अत्यंत प्राचीन है, जो वैदिक काल (हजारों वर्ष पूर्व) से चली आ रही है। यह परंपरा भारतीय संस्कृति में शुभता, ज्ञान और आध्यात्मिक ऊर्जा के प्रतीक के रूप में मांगलिक कार्यों, पूजा-पाठ और दैनिक जीवन में आदिकाल से प्रचलित है। वैदिक काल से, ग्रंथों में इसका विस्तार से वर्णन है। ललाट (मस्तक) के मध्य में, दोनों भौंहों के बीच 'आज्ञा चक्र' जिसे ब्रह्मा और रुद्र का वास स्थान माना जाता है, जहां तिलक लगाया जाता है जो सौभाग्य और दैवीय कृपा लाता है साथ ही शौर्य का प्रतीक माना जाता है।किसी भी शुभ कार्य, पूजा, या विदाई के समय तिलक लगाना अनिवार्य माना जाता है।
रिश्वत खोरी पर अंकुश लगाने में विफल पुलिस महानिदेशक का विचार
बिहार के पुलिस महानिदेशक विनय कुमार ने पुलिस वर्दी में ड्यूटी के दौरान तिलक, चंदन या कलावा जैसे धार्मिक चिन्ह लगाने पर 18 अप्रैल 2026 को प्रतिबंध लगा दिया है। पुलिस मैनुअल के उल्लंघन का हवाला देते हुए, इस आदेश का पालन न करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई (सेवा से हटाने) की चेतावनी दी गई है। इस कदम को पुलिस में पेशेवर छवि व एकरूपता बनाए रखने की बात कही गई। वहीं सत्यता को देखा जाए तो बिहार पुलिस कि पेशा रिश्वतखोरी के अलावा कुछ दिखाई नहीं देता। प्रदेश में वर्षों से पूर्ण शराब बंदी कानूनों को लागू होने के बावजूद भी कहीं कोई अंकुश देखने को नहीं मिल रहा है। विगत समय में अनेकों लोगों की जहरीली शराब से मौत भी हो चुकी है इतना ही नहीं बिहार की अनेकों प्रशासनिक अधिकारी व कर्मियों की शराब सेवन सहित शराब की तस्करी व गौ-तस्करी में भी संलिप्तता पाई गई है।आये दिन रिश्वतखोरी भ्रष्टाचार सहित अवैध वसूली की भी विडियो वायरल होते रहता है। पर बिहार के पुलिस महानिदेशक रिश्वतखोरी भ्रष्टाचार पर कड़ी कार्रवाई करने में विफल दिखे। भ्रष्टाचार रिश्वतखोरी तस्करी अवैध वसूली के विरुद्ध शायद इतना कड़ा रुख अख्तियार करते तो प्रदेश वासियों का कल्याण हो जाता है।
राष्ट्र में अन्य पंथ व मजहब को छूट सनातन पर ही प्रहार क्यों
भारतीय लोकतंत्र में सिख धर्म के लोग अपने गुरूओ की परंपरा कड़ा, कटार,केश कंघी,कच्छ व पगड़ी रख सकते है, वही मुस्लिम समुदाय के लोग 10 से 15 मिनट का समय लेकर अपना नमाज अदा कर सकते हैं।तो आखिर सनातन धर्म परंपराओं पर रोक क्यों?
यदि देखा जाए तो इसका मुख्य कारण एक ही है कि सनातन धर्म के लोग शांति और सौहार्द में विश्वास रखते हैं,जिस कारण बगावत नहीं कर सकते। पर सदियों से देखने को मिलते आ रहा है कि जब कोई बगावत पर उतरता है तो सदियों से चली आ रही सनातन धर्म की परंपरा के विरोधियों को मुंह की खानी पड़ती है। सनातन धर्म को छिन्न-भिन्न करने की ख्वाब देखने वाले छिन्न-भिन्न हो जाते हैं। प्रदेश सहित देश की सरकार और प्रशासन को एकता व एकरूपता देखना है तो जाति धर्म लिंग क्षेत्र आधारित कानूनों की समापन के लिए कानून बनाएं।
सरकार के द्वारा किसी भी सरकारी नौकरी में पदस्थापित होने के लिए न कोई सामान्य नियम है ना ही कानून, चाहे कितना भी पढ़ा लिखा व्यक्ति हो वह सवर्ण वर्ग का होने से नौकरी से वंचित रह जाता है। दुनिया के तमाम देश अच्छी गुणवत्ता के लोग तथा अच्छे अंक पाने वाले को लेकर देश की प्रगति करने के लिए कतार में खड़े हैं, तो वही भारतीय भीड़ तांत्रिक प्रक्रिया में बांटो राजनीति करो। राष्ट्र के गंदे नियमों के कारण अच्छे अंक प्राप्त करने वाले बच्चे नौकरी के लिए तरसते रह जाते हैं, और पढ़ाई लिखाई करने के बाद भी या चाय का ठेला लगाते हैं, या रिक्शा चलाते देखे जाते हैं। भारतीय संविधान हर वर्ग को अपने धर्म परंपरा के अनुसार जीने और रहने का अधिकार देता है तो किसी एक धर्म के लिए आजादी और दूसरे के लिए प्रतिबंध की प्रक्रिया लागू करना कहां तक उचित है। भारतीय लोकतांत्रिक प्रक्रिया में समता का अधिकार सचमुच लागू हो गया होता और अच्छे बच्चों और अच्छे अंक पाने वाले को सरकार प्राथमिकता देती तो आज भारत देश विश्व के शीर्ष पर खड़ा होता। लगता है भारतवासियों को विश्व गुरु की ख्वाब दिखाने वाले लोग मुख में राम बगल में छुरी कहावत चरितार्थ कर रहे हैं। सनातन धर्म एक जीने की कला है जो मानवता के प्रति संवेदनशील पारदर्शी सहिष्णुता और दया का भाव रखने वाला दुनिया में पहला धर्म है, जिस पर प्रतिबंध लगाना उचित नहीं है। विश्व में सनातन धर्म के आधार पर दुनिया में भारत की पहचान है उसको मिटाने की जो साजिश चल रही है वह कभी सफल हो ही नहीं सकती। क्योंकि सूर और असुर काल से ही सनातन धर्म को मिटाने की साजिश चल रही है जो कभी भी सफल नहीं हुई।नौकरी में योग्यता टैलेंट स्फूर्ति शारीरिक बल बौद्धिक परीक्षण क्वालिफिकेशन को सरकार को देखना चाहिए तथा उसके अधिकारी को न की तिलक व शिखा को। इससे क्या लगता है विभाग में ईमानदारी पारदर्शिता शक्ति से निपटने की क्षमता जल्द काम निपटाना की क्षमता आ सकती है या टैलेंट लोगों को जगह देने से इस पर गंभीरता पूर्वक अधिकारी और राजनेता तथा समाज को विचार करना चाहिए। देश की गंदी राजनीति देश को गंदे मार्ग पर ले जा रहा है लेकिन इस पर किसी का ध्यान नहीं जबकि इसका प्रमुख स्थान होना चाहिए चाहे राजनीति हो या नौकरी।


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