संगत का असर किसके साथ बैठते हैं, वैसा ही बनता है जीवन का नजरिया: मुटुर पाण्डेय
- सुनील कुमार, जिला ब्यूरो चीफ रोहतास
- Jun 04, 2026
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संवाददाता पारसनाथ दुबे ।
डेहरी ओन सोन रोहतास ।डेहरी अनुमंडल विधिज्ञ संघ के पूर्व अध्यक्ष उमाशंकर पाण्डेय ने जीवन में संगत और अनुभवों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि व्यक्ति जिस माहौल और लोगों के बीच समय बिताता है, उसका सीधा प्रभाव उसकी सोच और दृष्टिकोण पर पड़ता है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति दस मिनट किसी भिखारी के पास बैठे तो उसे जीवन बेहद कठिन प्रतीत होगा, जबकि किसी पियक्कड़ के पास बैठने पर जिंदगी बहुत आसान लग सकती है। साधु-संतों की संगति में वैराग्य की भावना जागृत होती है, वहीं किसी राजनेता के साथ बैठने पर व्यक्ति को अपनी पढ़ाई-लिखाई भी महत्वहीन लगने लगती है।
उन्होंने कहा कि जीवन बीमा एजेंट के साथ समय बिताने पर मृत्यु और भविष्य की चिंता बढ़ सकती है, जबकि किसी व्यापारी के पास बैठने पर अपनी आय बहुत कम महसूस होती है। वैज्ञानिकों के साथ चर्चा करने पर ज्ञान का महत्व समझ में आता है और यह एहसास होता है कि कई गलतियां अज्ञानता के कारण होती हैं।
उमाशंकर पाण्डेय ने कहा कि अच्छे शिक्षक के संपर्क में आने पर दोबारा विद्यार्थी बनने की इच्छा होती है। किसान और मजदूरों के कठिन परिश्रम को देखकर अपने श्रम की कमी का एहसास होता है, जबकि सैनिकों के त्याग और समर्पण को देखकर अपनी नौकरी और संघर्ष बहुत छोटे लगने लगते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि श्मशान घाट में किसी अर्थी के साथ कुछ समय बिताने पर जीवन की नश्वरता और माया-मोह का बोध होता है। वहीं, एक सच्चे मित्र के साथ बैठने पर जीवन स्वर्ग से भी सुंदर प्रतीत होने लगता है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे सकारात्मक और प्रेरणादायक लोगों की संगति में रहें, क्योंकि संगत ही व्यक्ति के विचारों, व्यवहार और जीवन की दिशा को तय करती है। उनके अनुसार, सही लोगों के साथ बिताया गया समय जीवन को बेहतर बनाने का सबसे सरल और प्रभावी माध्यम है।


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