विकास कार्यों के लिए धन नहीं, लेकिन दफ्तरों की सजावट पर लाखों

महापौर, उपमहापौर और सभापतियों के कार्यालयों के नवीनीकरण में नियमों की अनदेखी के आरोप, नागरिकों ने मांगा खर्च का पूरा हिसाब


भिवंडी। भिवंडी-निजामपुर महानगरपालिका एक बार फिर खर्च और पारदर्शिता को लेकर सवालों के घेरे में है। एक ओर मनपा प्रशासन विकास कार्यों और मूलभूत सुविधाओं के लिए धन की कमी का हवाला देता रहा है, वहीं दूसरी ओर महापौर, उपमहापौर, स्थायी समिति सभापति, गट नेताओं और प्रभाग समिति सभापतियों के कार्यालयों के सौंदर्यीकरण एवं नवीनीकरण पर लाखों रुपये खर्च किए जाने की चर्चा ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। सूत्रों के अनुसार, तीन वर्षों तक प्रशासक राज के बाद मनपा में नई सत्ता स्थापित होने के पश्चात जनप्रतिनिधियों के कार्यालयों को फिर से शुरू करने की प्रक्रिया शुरू हुई। इसी दौरान कार्यालयों में पुराने फर्नीचर हटाकर नए फर्नीचर लगाने, रंगरोगन, इंटीरियर सजावट और अन्य सौंदर्यीकरण कार्य बड़े पैमाने पर शुरू किए गए। आरोप है कि इन कार्यों के लिए नियमानुसार निविदा (टेंडर) प्रक्रिया अपनाने के बजाय कुछ चुनिंदा ठेकेदारों को सीधे काम सौंपा गया। मामले को लेकर मनपा के भीतर और बाहर दोनों जगह चर्चाओं का बाजार गर्म है। आरोप लगाने वालों का कहना है कि यदि लाखों रुपये के कार्य कराए गए हैं तो उनकी निविदा प्रक्रिया, स्वीकृति, अनुमानित लागत और भुगतान का पूरा ब्योरा सार्वजनिक किया जाना चाहिए। साथ ही यह भी सवाल उठ रहा है कि जिन कार्यालयों में पहले से पर्याप्त फर्नीचर और सुविधाएं उपलब्ध थीं, वहां अचानक बड़े पैमाने पर खर्च की जरूरत क्यों पड़ी। चर्चा यह भी है कि नवीनीकरण कार्यों में उपयोग की जा रही सामग्री की गुणवत्ता और उसके लिए प्रस्तावित खर्च के बीच भारी अंतर हो सकता है। कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आशंका जताई है कि कम लागत वाली सामग्री का उपयोग कर अधिक मूल्य के बिल प्रस्तुत किए जा सकते हैं। हालांकि इन आरोपों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

गौरतलब है कि शहर में सड़कों की दुर्दशा, जलनिकासी की समस्याएं, जर्जर इमारतों का खतरा और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दे लगातार चर्चा में बने हुए हैं। ऐसे में जनप्रतिनिधियों के कार्यालयों के सौंदर्यीकरण पर कथित रूप से लाखों रुपये खर्च किए जाने की खबरों ने नागरिकों में नाराजगी बढ़ा दी है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि मनपा प्रशासन नवीनीकरण कार्यों से संबंधित सभी दस्तावेज सार्वजनिक करे। इनमें टेंडर प्रक्रिया, कार्यादेश, खर्च की गई राशि, संबंधित ठेकेदारों के नाम और उपयोग की गई सामग्री का विवरण शामिल किया जाए। साथ ही पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके। अब निगाहें मनपा आयुक्त और प्रशासनिक अधिकारियों पर टिकी हैं। यदि सभी कार्य नियमों के तहत किए गए हैं तो प्रशासन को पारदर्शिता दिखाते हुए पूरे मामले का खुलासा करना चाहिए। वहीं यदि कहीं अनियमितता हुई है तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी जोर पकड़ने लगी है। शहर में चर्चा का विषय बना यह मामला आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि नागरिक अब विकास कार्यों से अधिक जनप्रतिनिधियों के कार्यालयों पर हो रहे खर्च का हिसाब मांग रहे हैं।

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